इसराइल में ईरान के संभावित हमले को लेकर तनाव काफी बढ़ गया है। वहां की सरकार ने अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। अस्पतालों को अपनी तैयारी पूरी करने और सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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इसराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि देशभर के अस्पताल अपने कामकाज को जमीन के नीचे बने सुरक्षित बंकरों और मजबूत किलों जैसे कमरों में शिफ्ट करें। यह कदम उत्तरी इसराइल पर हुए मिसाइल हमलों के बाद उठाया गया है। मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि मेडिकल सेंटर अपनी इमरजेंसी प्रक्रियाएं शुरू करें और होम फ्रंट कमांड के साथ तालमेल बिठाएं।

अस्पतालों को अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात करने और स्थिर मरीजों को छुट्टी देने के लिए कहा गया है। साथ ही, सभी गैर-जरूरी और इलेक्टिव सर्जरी रद्द कर दी गई हैं। जिन क्लीनिकों के पास बम शेल्टर नहीं हैं, उन्हें काम बंद करने का आदेश मिला है। नेगेव के Soroka Hospital ने पहले ही अपने ऑपरेशन सुरक्षित इलाकों में शिफ्ट कर दिए थे और वहां केवल इमरजेंसी केस ही लिए जा रहे हैं।

मिलेट्री अपडेट की बात करें तो 14 जून को ईरान के सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बेरूत के दक्षिणी इलाकों में इसराइल द्वारा की गई कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इसके जवाब में IDF चीफ ऑफ स्टाफ Lt.-Gen. Eyal Zamir ने पुष्टि की है कि सेना सभी मोर्चों पर हाई अलर्ट और पूरी तैयारी के साथ तैनात है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा कि बेरूत के Dahiyeh इलाके में हमले हिजबुल्लाह की फायरिंग का जवाब थे और इसराइल अपनी जमीन पर हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

युद्ध की इन आशंकाओं के बीच शांति के लिए राजनयिक कोशिशें भी चल रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संकेत दिया है कि एक शांति समझौता बहुत करीब है। पाकिस्तान और कतर इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। चर्चा है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो सकता है, जबकि अमेरिका ईरान को अपने यूरेनियम स्टॉक को कम करने की अनुमति दे सकता है।