Lebanon में सीजफायर के बाद भी इसराइल का हमला जारी, Haddatha शहर में हुआ बड़ा धमाका.

लेबनान में चल रहे संघर्ष के बीच इसराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में ताबड़तोड़ हमले तेज कर दिए हैं। 22 अगस्त 2026 को इसराइली सेना ने हद्दाथा शहर को निशाना बनाया, जिससे वहां एक बड़ा विस्फोट हुआ। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, यह हमला पूरे इलाके में चलाए जा रहे गोलाबारी और तोड़फोड़ अभियानों का ही एक हिस्सा था। इस कार्रवाई के कारण आम लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं और पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।
किन-किन इलाकों को बनाया गया निशाना
इसराइली सैनिकों ने बेत याहून, आइता अल-जबाल, मंसूरी, बायत अल-सय्याद के पास और मजदूल जून के बाहरी इलाकों समेत कई जगहों को अपने हमलों की चपेट में लिया। रात भर हुई भारी बमबारी की वजह से बायत अल-सय्याद में कई घर पूरी तरह से तबाह हो गए। इसके अलावा, इसराइली युद्धक विमानों ने श्रीबीन घाटी में एक मिसाइल दागी, जबकि तोपखाने से अदशीट अल-क्साइर, नबातिया अल-फवका और अली ताहिर इलाकों पर गोले बरसाए गए।
क्या है युद्धविराम का हाल
यह तमाम सैन्य कार्रवाई उस समझौते के बावजूद जारी है जो 17 अप्रैल 2026 से लागू है। इसके अलावा 26 जून 2026 को एक अमरीकी मध्यस्थता वाला फ्रेमवर्क समझौता भी साइन हुआ था। इस समझौते के तहत लेबनान के कब्जे वाले इलाकों से इसराइल को चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना था और इसके बदले लेबनानी सेना की तैनाती तथा हिजबुल्लाह समेत अन्य सशस्त्र समूहों को हथियारों से मुक्त करना था। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 मार्च से लेकर अब तक इसराइली हमलों में 4,348 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 12,307 लोग घायल हुए हैं। इस बारे में अधिक जानकारी QNA News पर उपलब्ध है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया
बढ़ते हमलों को लेकर दुनिया भर से चिंता जताई जा रही है। कनाडा, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी कर इस संघर्ष के बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और तुरंत युद्धविराम नियमों का पालन करने की बात कही है। दूसरी ओर सीरिया ने गोलान हाइट्स के पास एक इसराइली ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है, जिसमें 22 अगस्त को एक व्यक्ति घायल हो गया था। इस बीच कूटनीतिक मोर्चे पर इसराइल के रक्षा मंत्री इस्राइल कैट्स ने गोलान हाइट्स को लेकर अमरीकी राजदूत टॉम बराक के बयानों को खारिज कर दिया और उन्हें गलत बताया है। साथ ही फ्रांस और ब्रिटेन के 100 से ज्यादा पूर्व राजनयिकों ने एक पत्र पर साइन करके इसराइल पर जातीय सफाए का आरोप लगाया है और फिलिस्तीनी राज्य के गठन के लिए व्यापार और हथियार बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की है।