इसराइल की नेवी ने गाजा की तरफ जा रहे जहाजों के एक बड़े ग्रुप को बीच समुद्र में रोक लिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस कार्रवाई की तारीफ करते हुए इसे हमास का समर्थन करने वालों के खिलाफ एक सफल मिशन बताया। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है और कई देशों ने इसराइल के इस कदम का विरोध किया है।

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इसराइल ने जहाजों के काफिले को क्यों रोका?

इसराइल ने 29 और 30 अप्रैल 2026 की दरमियान अंतरराष्ट्रीय पानी में इन जहाजों को पकड़ा। इस ग्रुप का नाम Global Sumud Flotilla था जिसमें करीब 20 से 58 जहाज शामिल थे। इसराइल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई गाजा की कानूनी नाकाबंदी को बनाए रखने और तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए की गई। मंत्रालय ने यह दावा भी किया कि जहाजों पर कुछ नशीले पदार्थ और कंडोम मिले जिससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई मदद का मिशन नहीं बल्कि एक मौज-मस्ती की यात्रा थी।

दुनिया के अलग-अलग देशों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?

इस घटना पर दुनिया की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने इसे हमास समर्थित संस्था का एक बेकार स्टंट बताया। दूसरी तरफ स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इसराइल की कड़ी निंदा की और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। स्पेन ने यूरोपीय संघ से इसराइल के साथ अपने समझौते को रोकने की भी मांग की है। तुर्की ने इस कार्रवाई को समुद्री डकैती करार दिया है। इटली और जर्मनी ने भी इस घटना पर गहरी चिंता जताई है, जबकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हिरासत में लिए गए लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।

पकड़े गए एक्टिविस्ट्स और जहाजों की क्या स्थिति है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ऑपरेशन में 175 से 211 एक्टिविस्ट्स को हिरासत में लिया गया है। इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने बताया कि ग्रीस सरकार के साथ तालमेल बिठाकर इन लोगों को एक ग्रीक बीच पर उतारा जाएगा। वहीं, फ्लोटिला चलाने वालों का आरोप है कि इसराइली सेना ने उन पर हिंसक हमला किया और जहाजों के इंजन और नेविगेशन सिस्टम को तोड़ दिया। खबर है कि अब भी करीब 30 से 36 जहाज रास्ते में हैं या ग्रीस के समुद्री इलाके में मौजूद हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इस ऑपरेशन में कितने लोग हिरासत में लिए गए?

इसराइल ने करीब 175 से 211 एक्टिविस्ट्स को हिरासत में लिया है जिन्हें ग्रीस सरकार के सहयोग से वहां उतारा जाएगा।

इस घटना का विरोध करने वाले प्रमुख देश कौन से हैं?

स्पेन, तुर्की, इटली और जर्मनी ने इसराइल की इस कार्रवाई की निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।