इसराइल की सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ नाम के सहायता जहाजों के बेड़े को रोक लिया है। यह घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को हुई, जिसमें कई देशों के नागरिक शामिल थे। तुर्की ने इस कार्रवाई पर कड़ा गुस्सा जाहिर किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का बड़ा उल्लंघन बताया है।

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इसराइल ने कैसे की जहाजों की घेराबंदी और क्या हुआ?

इसराइल की सेना ने ग्रीस के क्रीट द्वीप के पास अंतरराष्ट्रीय पानी में इस बेड़े को घेरा। रिपोर्ट के मुताबिक इस काफिले में 58 से 100 नावें थीं, जिनमें 400 से 1000 आम नागरिक और एक्टिविस्ट सवार थे। यह बेड़ा गाजा की नाकाबंदी को तोड़कर वहाँ मदद पहुँचाने के लिए निकला था।

  • इसराइली जहाजों ने पहले संचार व्यवस्था को बाधित किया और फिर नावों को घेरा।
  • कुल 58 नावों में से 21 नावों को इसराइल ने अपने कब्जे में ले लिया।
  • करीब 17 नावें किसी तरह बचकर ग्रीस के समुद्री क्षेत्र में पहुँचने में सफल रहीं।
  • इस पूरी कार्रवाई के दौरान करीब 175 एक्टिविस्टों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 18 से 20 तुर्की के नागरिक भी शामिल हैं।

तुर्की सरकार और अधिकारियों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?

तुर्की ने इस घटना को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों के खिलाफ है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि वे अपने नागरिकों और अन्य यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं।

तुर्की के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर बुरहनेतिन दुरान ने इसे एक अस्वीकार्य हमला बताया और कहा कि इसराइल अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में डकैती कर रहा है। वहीं, सत्ताधारी AK पार्टी के प्रवक्ता ओमर सेलिक ने इस घटना को ‘बर्बरता’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ कहा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस बुएनो से चर्चा की और इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने की अपील की।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला क्या है?

यह एक मानवीय सहायता काफिला था जिसमें 58 से 100 नावें और करीब 400 से 1000 नागरिक शामिल थे। इसका मुख्य उद्देश्य गाजा की नाकाबंदी को खत्म कर वहां सहायता पहुँचाना था।

इस घटना में कितने लोग हिरासत में लिए गए हैं?

इसराइली सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में करीब 175 एक्टिविस्टों को हिरासत में लिया है, जिनमें लगभग 18 से 20 तुर्की के नागरिक शामिल हैं।