लेबनान और इसराइल के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. 9 अप्रैल 2026 को इसराइल ने लेबनान की तरफ से दागे गए एक रॉकेट को बीच रास्ते में ही रोक दिया. अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीज़फायर के बाद भी लेबनान में हालात काफी गंभीर बने हुए हैं और पिछले 24 घंटों में हमलों की वजह से सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. आम नागरिकों पर हो रहे इन हमलों की वजह से पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है.

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सीज़फायर के बाद भी लेबनान में हमले क्यों हो रहे हैं?

अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीज़फायर का समझौता हुआ था लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कर दिया है कि यह समझौता लेबनान के लिए नहीं है. इसराइल का कहना है कि वह Hezbollah के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा ताकि सीमा के पास रहने वाले उनके नागरिक सुरक्षित रहें. वहीं दूसरी तरफ Hezbollah के नेताओं ने आरोप लगाया है कि इसराइल समझौते का उल्लंघन कर रहा है और लेबनान में मासूम लोगों को निशाना बना रहा है. लेबनान सरकार ने इसराइली हमलों को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है.

लेबनान और इसराइल के बीच मौजूदा हालात के मुख्य अपडेट

तारीख घटना का विवरण
8 अप्रैल 2026 इसराइली हमलों में लेबनान में 254 लोगों की मौत हुई, जो सबसे घातक दिन रहा.
9 अप्रैल 2026 इसराइल ने लेबनान से आए रॉकेट को मार गिराया और Al Jazeera के पत्रकार की मौत हुई.
2 मार्च 2026 लेबनान और इसराइल के बीच युद्ध की औपचारिक शुरुआत हुई.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने लेबनान में हो रहे इन हमलों को काफी भयानक बताया है. लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की अपील की है ताकि लेबनान को भी क्षेत्रीय शांति समझौते में शामिल किया जा सके. इसराइल की सेना ने दक्षिणी लेबनान के अंदर कई किलोमीटर तक अपने पैर जमा लिए हैं और वहां जमीनी ऑपरेशन लगातार जारी है. इस बीच गाज़ा में भी हवाई हमलों में एक पत्रकार की जान जाने की खबर आई है.