New York Times की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसराइल ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को खराब करने के लिए वहां के बड़े नेताओं की हत्या करने की योजना बनाई थी. इस साजिश का मकसद डिप्लोमैटिक बातचीत को पूरी तरह से रोकना था. अमेरिका ने इस बारे में ईरान को गुप्त तरीके से चेतावनी भी दी थी ताकि युद्ध को दोबारा शुरू होने से रोका जा सके.

ℹ️: US का ईरान को बड़ा अलर्ट, कहा अधिकारियों की हो सकती है हत्या, इसराइल की नज़र Araghchi और Ghalibaf पर

किन नेताओं को बनाया गया था निशाना

रिपोर्ट के मुताबिक इसराइल की नजर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf पर थी. अमेरिकी अधिकारियों को शक था कि 8 अप्रैल को ceasefire (युद्धविराम) होने के बाद के हफ्तों में इसराइल इन दोनों की हत्या कर सकता था.

प्लेन पर हमले की कोशिश और इमरजेंसी लैंडिंग

12 अप्रैल को एक बड़ा खतरा सामने आया जब Mohammad Bagher Ghalibaf इस्लामाबाद में बातचीत के बाद ईरान लौट रहे थे. ईरानी सुरक्षा बलों ने उनके प्लेन को जानकारी दी कि दो इसराइली फाइटर जेट्स इराक के रास्ते ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसे हैं और हमला कर सकते हैं. इस खतरे की वजह से प्लेन को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी और उन्होंने अपनी आगे की यात्रा सड़क मार्ग से पूरी की.

अमेरिका की भूमिका और चेतावनी

अमेरिका ने इस मामले में बीच-बचाव किया और अपने क्षेत्रीय पार्टनर्स के जरिए ईरान को चेतावनी भेजी. अमेरिकी अधिकारियों को डर था कि अगर ये हत्याएं होती हैं, तो ceasefire टूट जाएगा और फिर से बड़ा युद्ध शुरू हो जाएगा. इस पूरे मामले में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance, मध्य पूर्व दूत Witkoff और Kushner ने ईरान के साथ गहन संपर्क बनाए रखा.

सुरक्षा और युद्ध की पृष्ठभूमि

  • ईरान ने अपने नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी थी और विदेश यात्राओं के दौरान फाइटर जेट्स का सुरक्षा घेरा रखा था.
  • यह युद्ध इसी साल 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब एक इसराइली हमले में सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई थी.
  • एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि वॉशिंगटन से अनुरोध के बाद इसराइल ने Araghchi और Ghalibaf का नाम अपनी हिट लिस्ट से हटा दिया था.