पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 8 जून 2026 को इसराइली सेना ने ईरान के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले करने का दावा किया है। इन हमलों के बाद ईरान के कई बड़े शहरों में तेज धमाके सुने गए और ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इसराइल पर कई मिसाइलें दागी हैं। इस ताज़ा सैन्य टकराव ने दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल 2026 से लागू नाजुक संघर्षविराम को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया है और खाड़ी क्षेत्र में हलचल तेज कर दी है।

इसराइल और ईरान के बीच ताज़ा हमले की बड़ी वजह क्या है?

ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान के अनुसार, 7 जून 2026 को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्से पर इसराइल ने एक हवाई हमला किया था। ईरान का कहना है कि इस हमले ने सभी हदें पार कर दी थीं। इसके जवाब में ईरान ने इसराइल पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद 8 जून को तड़के इसराइल ने ईरान के ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए। इसराइली सेना का दावा है कि उन्होंने ईरान के रणनीतिक हवाई रक्षा प्रणालियों और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है ताकि ईरान की जवाबी क्षमता को कमजोर किया जा सके। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम ईरान के माहशहर में एक पेट्रोकेमिकल प्लांट को भी निशाना बनाया गया है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदी

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसराइली हमलों के जवाब में इसराइल के नेवातिम और तेल नोफ हवाई अड्डों को निशाना बनाने का दावा किया है। हमलों के तुरंत बाद ईरान सरकार ने सुरक्षा कारणों से तेहरान के इमाम खुमैनी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने तेहरान, इस्फ़हान, करज और तबरीज़ जैसे बड़े शहरों में धमाकों की पुष्टि की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि उत्तरी इसराइल पर उनके हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा में किए गए हैं क्योंकि इसराइल लगातार उनके हितों को नुकसान पहुंचा रहा था।

यमन के हूती विद्रोहियों का एक्शन और अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यमन के हूती गुट ने भी इसराइल पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है और लाल सागर में इसराइली जहाजों के जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों से तुरंत गोलाबारी रोकने की अपील की है। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्ष तुरंत संघर्षविराम चाहते हैं और उन्होंने इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को तुरंत जवाबी कार्रवाई न करने की सलाह दी है। IRGC ने भी घोषणा की है कि उन्होंने अपना कड़ा जवाब दे दिया है और फिलहाल सैन्य अभियान रोक दिया है, लेकिन अगर फिर से हमला हुआ तो और भी गंभीर कार्रवाई की जाएगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान और इसराइल के बीच का पुराना संघर्षविराम टूट गया है?

हां, 8 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच एक नाजुक समझौता हुआ था, लेकिन 8 जून 2026 को हुए हमलों के बाद यह संघर्षविराम गंभीर खतरे में पड़ गया है।

हमले के बाद ईरान ने हवाई यातायात को लेकर क्या कदम उठाए हैं?

हमले के तुरंत बाद ईरान ने तेहरान हवाई अड्डे के आसपास के हवाई क्षेत्र को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया, जबकि इराक और सीरिया ने भी अस्थायी हवाई पाबंदियां लागू की हैं।

इस तनाव पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का क्या रुख है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों से तुरंत हमले रोकने की अपील की है और इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को बड़ी जवाबी कार्रवाई न करने की सलाह दी है।