Israel और Iran जो कभी अच्छे दोस्त हुआ करते थे, अब एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन चुके हैं। इसराइल अब ईरान को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान रहा है। इसराइल की सबसे बड़ी चिंता ईरान का वो नेटवर्क है जो उसकी सीमाओं के आसपास फैला हुआ है, जिसकी वजह से उसे लगातार प्रॉक्सी युद्ध लड़ने पड़ रहे हैं।
ईरान दे रहा है उग्र संगठनों को मदद
ईरान कई ऐसे संगठनों की मदद कर रहा है जो इसराइल के खिलाफ हैं। लेबनान में मौजूद Hezbollah को ईरान से काफी पैसा, एडवांस रॉकेट और मिलिट्री ट्रेनिंग मिलती है। इसराइल का यह भी कहना है कि फिलिस्तीन में Hamas के हमलों के पीछे ईरान की आर्थिक और रणनीतिक मदद है। इसके अलावा, यमन के Houthi विद्रोही भी ईरान के समर्थन से लाल सागर में इसराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बना रहे हैं।
‘ग्रेटर इसराइल’ की सोच और राजनीतिक असर
पिछले कुछ सालों में इसराइल के कड़े रुख के पीछे कुछ धार्मिक और वैचारिक कारण हैं। Netanyahu सरकार के कई कट्टरपंथी और धार्मिक नेताओं के बीच ‘ग्रेटर इसराइल’ (अविभाजित इसराइल) की मान्यता काफी मजबूत है। यह विचार पुरानी किताब ‘Book of Genesis’ से लिया गया है। इस सोच के मुताबिक, इसराइल के क्षेत्र में जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, मिस्र, इराक और सऊदी अरब के कुछ हिस्से भी शामिल होने चाहिए।
