इसराइल और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब टूटने की कगार पर है। ताज़ा खबरों के मुताबिक इसराइल जल्द ही इस बातचीत की नाकामी का ऐलान कर सकता है। वहीं अमेरिका ने भी ईरान पर हमला करने के लिए अपना सैन्य प्लान तैयार कर लिया है जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है।

इसराइल और ईरान की बातचीत क्यों हुई फेल

इज़राइली चैनल 12 के मुताबिक इसराइल अब इस बात की घोषणा करने वाला है कि ईरान के साथ बातचीत नाकाम रही। खबरें आई हैं कि इसराइल अगले हफ्ते की शुरुआत से ही ईरान के साथ दोबारा लड़ाई शुरू करने की तैयारी में है। इसराइल चाहता था कि अमेरिका बातचीत के लिए एक तय समय सीमा रखे लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि बात नहीं बनेगी। इसराइल के रक्षा मंत्री यिसराएल काट्स ने पहले ही कहा था कि वे ईरान पर फिर से हमला करने के लिए तैयार हैं और बस अमेरिका के इशारे का इंतज़ार कर रहे हैं।

अमेरिका का नया हमलावर प्लान और नाकाबंदी

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका की सेंटकॉम (CENTCOM) ने ईरान के अहम ठिकानों पर छोटे लेकिन असरदार हमले करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस प्लान को देखेंगे ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके और बातचीत की रुकी हुई प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। ट्रम्प ने यह भी कहा कि समुद्र में लगाई गई नाकाबंदी से ईरान की तेल बिक्री रुक गई है और यह तरीका काम कर रहा है। इस पूरी खींचतान में पाकिस्तान दोनों देशों के बीच बीच-बचाव की कोशिश कर रहा है।

ईरान का क्या है इस पर कहना

ईरान के नेता मुजतबा खामेनेई ने एक संदेश में कहा है कि खाड़ी देशों और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में अब एक नया दौर शुरू हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के बिना इस इलाके का भविष्य बेहतर होगा। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उनके जहाजों को रोका गया तो वे सैन्य कार्रवाई का जवाब देंगे। हालांकि इससे पहले 8 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ था, लेकिन पाकिस्तान में हुई बातचीत के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इसराइल और ईरान के बीच फिर से युद्ध शुरू होगा

इसराइल अगले हफ्ते से लड़ाई शुरू करने की तैयारी कर रहा है और अमेरिका ने भी ईरान के अहम ठिकानों पर सैन्य हमले का प्लान तैयार कर लिया है।

अमेरिका ईरान पर किस तरह दबाव बना रहा है

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी की है ताकि तेल का निर्यात कम हो और ईरान बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर हो।