ईरान और इसराइल के परमाणु हथियारों को लेकर दुनिया भर में एक नई बहस छिड़ गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन दोनों देशों के साथ अलग-अलग व्यवहार कर रहा है। जहाँ ईरान की हर हरकत पर डर और चिंता जताई जाती है, वहीं इसराइल की परमाणु क्षमता को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का हिस्सा है, इसलिए उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए और उसकी बारीकी से जांच की गई। इसके उलट, इसराइल इस संधि का हिस्सा नहीं है और उसने कभी अपनी परमाणु क्षमता को न तो स्वीकार किया और न ही इनकार किया, फिर भी उसे किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय सजा नहीं मिली। जानकारों का मानना है कि इसराइल के पास करीब 80 से 90 परमाणु हथियार हैं।

ईरान के संयुक्त राष्ट्र दूत अमीर सईद इरावानी ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इसराइल के मामले में संयुक्त राष्ट्र और IAEA दोहरे मापदंड अपनाते हैं। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने भी पश्चिमी देशों और IAEA पर पाखंड का आरोप लगाया था।

हालिया अपडेट और विवाद

4 जुलाई 2026 को आई खबर के मुताबिक, इसराइल की खुफिया एजेंसियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस दावे को खारिज कर दिया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म हो गया है। खुफिया अधिकारियों ने बताया कि जून 2025 में हुए हमलों से ईरान को काफी नुकसान हुआ है, लेकिन वह पूरी तरह बर्बाद नहीं हुआ है।

वहीं 2 जुलाई 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगेई ने साफ कर दिया कि वे IAEA के निरीक्षकों को उन साइटों पर नहीं जाने देंगे जहाँ हमले हुए थे। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कानूनन केवल बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट और तेहरान रिसर्च रिएक्टर तक ही पहुंच दी जा सकती है।

IAEA के चीफ राफेल मारियानो ग्रॉसी ने ईरान द्वारा यूरेनियम को 60% तक समृद्ध करने पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जांच और सहयोग के यह भरोसा दिलाना मुश्किल है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण कामों के लिए है।

दिसंबर 2024 में आई एक अमेरिकी रिपोर्ट ने भी यह बात साफ की थी कि 1960 के दशक में इसराइल का डिमोना परमाणु प्रोजेक्ट हथियारों से जुड़ा था। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल ईरान की निगरानी पर ही ज्यादा जोर दिया जाता रहा है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.