Israel और Iran के बीच तनाव बढ़ा, इसराइल ने दी एकतरफा सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

खाड़ी देशों के लिए एक बार फिर से चिंता की स्थिति बनी हुई है। इजराइल अब ईरान के खिलाफ अकेले ही सैन्य कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। 8 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल ने अपनी सैन्य रणनीति को इस दिशा में मोड़ दिया है। यह फैसला तब आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है और दुनिया भर की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।
इजराइल और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव
इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 5 अगस्त को एक कड़ा बयान दिया था। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए इजराइल किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने ईरान के IRGC कमांडर Ahmad Vahidi के बयानों का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर परमाणु हथियार बनाने की बात कही गई थी। इसी बयान के बाद से ही क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
क्षेत्रीय देशों पर क्या है असर
तनाव का असर खाड़ी देशों के समुद्री रास्तों पर भी दिखाई दे रहा है। 8 अगस्त को UAE ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर अपने एक ADNOC जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। यह हमला Strait of Hormuz में हुआ था। आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष की शुरुआत से अब तक UAE के कुल 15 जहाजों को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा UK Maritime Trade Operations Center ने भी ओमान के Khasab के पास एक जहाज पर हमले की जानकारी दी है।
कूटनीतिक प्रयासों की क्या स्थिति है
तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि अब होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए कोई समझौता करने का सबसे अच्छा समय है। वहीं, अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ General Dan Caine किसी बड़े युद्ध को टालने के लिए बीच का रास्ता तलाश रहे हैं। Qatari Foreign Ministry के प्रवक्ता Majed Al-Ansari ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता प्रक्रिया 4 अगस्त तक काफी आगे बढ़ चुकी थी और दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान भी हुआ है।
ईरान की चेतावनी
दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 1 अगस्त को चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका या इजराइल ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, या क्षेत्र के अन्य देशों ने उनका साथ दिया, तो ईरान इसका निर्णायक जवाब देगा। यह स्थिति खाड़ी में रह रहे लाखों प्रवासियों और भारतीय कामगारों के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि किसी भी सैन्य तनाव का असर तेल की कीमतों और समुद्री सुरक्षा पर सीधा पड़ता है।