अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल और लेबनान के बीच संघर्ष को रोकने के लिए युद्धविराम की कोशिशें की हैं। लेकिन इसराइल के अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता बहुत कम समय तक चलेगा जिससे पूरे इलाके में तनाव बढ़ सकता है। इस स्थिति के बीच इसराइल ने वाशिंगटन से साफ कह दिया है कि ईरान की समुद्री नाकाबंदी में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए।

Trump का ceasefire और ईरान की नाकाबंदी का क्या मामला है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 अप्रैल को हिज़्बुल्लाह और इसराइल के बीच युद्धविराम को तीन हफ्ते के लिए आगे बढ़ाया था। इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री नाकाबंदी जारी रखी है। ईरान के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इस नाकाबंदी की वजह से शांति वार्ता रुकी हुई है। अमेरिकी सेना ने हाल ही में एक ईरानी तेल टैंकर को भी बीच समुद्र में पकड़ा था।

इसराइल और लेबनान के बीच क्या स्थिति है?

भले ही ट्रंप ने युद्धविराम की अवधि बढ़ाई है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इसराइल अब भी लेबनान पर हमले कर रहा है। लेबनान का हिज़्बुल्लाह समूह इस समझौते को मानने से इनकार कर चुका है। इसराइल और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत के बावजूद क्षेत्र में शांति नहीं दिख रही है और इसराइल इसे एक कमजोर समझौता मान रहा है।

मई की समय सीमा और आगे की चुनौती क्या है?

अमेरिका के ‘War Powers Act’ के नियम के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप के पास सैन्य कार्रवाई के लिए 1 मई तक की समय सीमा है। अगर कांग्रेस से मंजूरी नहीं मिली तो उन्हें इस युद्ध को सीमित करना होगा। ट्रंप ने पहले ही संकेत दिया था कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिकी सेना बमबारी के लिए तैयार है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि 1 मई के बाद अमेरिका क्या कदम उठाता है।

Sushma Kumari

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