इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब एक बड़े युद्ध में बदल चुका है। 13 मार्च 2026 को इजरायल ने आधिकारिक तौर पर यह बताया है कि ईरान और हिजबुल्लाह की तरफ से उसकी सीमा पर कई मिसाइलें दागी गई हैं। इन हमलों से इजरायल के कई मुख्य इलाकों में खतरे के सायरन बजने लगे। यह युद्ध अब अपने 13वें दिन में पहुंच गया है और इसका सीधा असर पूरे मिडिल ईस्ट के देशों पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों में रहने वाले और काम करने वाले लोगों के लिए भी यह माहौल काफी चिंताजनक बनता जा रहा है।

ईरान और हिजबुल्लाह ने कैसे किया हमला?

आधिकारिक जानकारी के अनुसार 12 मार्च को हिजबुल्लाह ने लेबनान की तरफ से उत्तरी इजरायल पर महज एक घंटे के अंदर 100 से ज्यादा रॉकेट दागे। इसके साथ ही ईरान की सेना (IRGC) ने भी इजरायल के एयर बेस और तेल अवीव में स्थित खुफिया हेडक्वार्टर को अपना निशाना बनाया। इन मिसाइल हमलों के कारण मध्य इजरायल और यरूशलेम के आसपास लगातार सायरन बजते रहे। एक मिसाइल सीधे एक घर पर गिरी जिससे वहां कई आम नागरिक घायल हो गए। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस तनाव में अब तक इजरायल में 11 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 1000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

इजरायल का पलटवार और खाड़ी देशों पर इसका असर

इन हमलों का जवाब देते हुए इजरायल की सेना (IDF) ने भी बड़ी कार्रवाई की है। इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की कई मिसाइलों को यरूशलेम के आसमान में ही नष्ट कर दिया। इसके तुरंत बाद इजरायली सेना ने लेबनान और बेरूत में हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर और मिसाइल ठिकानों पर भारी बमबारी की। इस जंग का असर अब खाड़ी देशों के कामकाज पर भी पड़ रहा है। इराक और ओमान को तेल टैंकरों पर हमले के बाद अपने ऑयल टर्मिनल बंद करने पड़े हैं। इसके अलावा ईरान ने समुद्री व्यापार के अहम रास्ते होर्मुज में माइंस बिछा दिए हैं जिससे आने वाले समय में आवाजाही और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.