इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को एक महीना पूरा हो गया है। इज़रायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफ़ी डिफ्रिन ने जानकारी दी है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुँचाया गया है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का मानना है कि जमीन के नीचे सुरक्षित यूरेनियम अब भी बड़ा खतरा बना हुआ है। इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इज़रायल पर मिसाइल हमले किए हैं जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

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इज़रायली सेना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर क्या है ताज़ा स्थिति?

ब्रिगेडियर जनरल एफ़ी डिफ्रिन ने कहा है कि इज़रायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा और ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने देगा। इज़रायल अब बहु-फ्रंट युद्ध की तैयारी कर रहा है क्योंकि उसे कई दिशाओं से खतरों का सामना करना पड़ रहा है। इज़रायली सेना के मुताबिक वे सिर्फ बातें नहीं करते बल्कि कार्रवाई पर भरोसा करते हैं।

  • IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी के अनुसार ईरान के इस्फ़हान परमाणु केंद्र के पास भूमिगत सुरंगों में समृद्ध यूरेनियम का भंडार अब भी सुरक्षित हो सकता है।
  • 22 मार्च को इज़रायली हवाई रक्षा प्रणाली दक्षिणी इज़रायल में कुछ ईरानी मिसाइलों को रोकने में विफल रही थी जिसकी जांच की जा रही है।
  • इज़रायल ने स्पष्ट किया है कि जो भी उनके नागरिकों को धमकी देगा उस पर हमला किया जाएगा।
  • अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था जिसे ईरान ने अव्यवहारिक बताकर खारिज कर दिया है।

युद्ध के ताज़ा हालात और हूती विद्रोहियों के हमले से जुड़ी बड़ी बातें

28 मार्च 2026 को यमन के हूती विद्रोहियों ने इज़रायल के सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल याह्या सरी ने इन हमलों की पुष्टि की है। इज़रायल अमेरिका और ईरान के बीच यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था और अब इसे एक महीना बीत चुका है।

मुख्य घटना विवरण
हूती हमला 28 मार्च को इज़रायली सैन्य ठिकानों पर मिसाइल दागी गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान ने वैश्विक तेल मार्ग को बंद कर दिया है।
लेबनान मोर्चा इज़रायल पिछले तीन हफ्तों से हिजबुल्लाह के साथ जमीनी लड़ाई में है।
ट्रंप की समय सीमा अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमलों को 6 अप्रैल 2026 तक टाला है।
ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है।
IAEA का रुख परमाणु बुनियादी ढांचे को नुकसान के बाद भी खतरा बरकरार है।