इसराइल पर ईरान और हूतियों का बड़ा हमला, सऊदी और UAE में भी गिरी मिसाइलें, कुवैत में सैनिक घायल
मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है और स्थिति गंभीर बनी हुई है। 6 और 7 अप्रैल 2026 को ईरान, यमन के हूती विद्रोहियों और हिज़्बुल्लाह ने मिलकर इसराइल पर एक बड़ा और समन्वित हमला किया। इस हमले के दौरान इसराइल के कई शहरों में मिसाइलें और ड्रोन गिरे, जिससे काफी नुकसान हुआ है। खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में भी इस तनाव का सीधा असर देखा गया है, जहाँ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया है।
इसराइल और ईरान के बीच हुए हमलों की ताज़ा स्थिति क्या है?
ईरान और उसके सहयोगियों ने इसराइल के ईलात, हाइफ़ा और तेल अवीव जैसे प्रमुख शहरों को निशाना बनाया है। इसराइली सेना (IDF) ने पुष्टि की है कि कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हवा में ही नष्ट किए गए, लेकिन कुछ जगहों पर इनके गिरने से नुकसान हुआ है। हाइफ़ा में मिसाइल का मलबा गिरने से 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि तेल अवीव में कई लोग घायल हुए हैं। जवाब में इसराइल ने ईरान के पेट्रोकेमिकल संयंत्रों और तीन हवाई अड्डों पर हवाई हमले किए हैं।
खाड़ी देशों और वहां रहने वालों पर इसका क्या असर पड़ा?
इस युद्ध का असर खाड़ी देशों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है। खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
- सऊदी अरब ने 7 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया, जिनका मलबा ऊर्जा केंद्रों के पास गिरा है।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अपने क्षेत्र में आने वाली मिसाइलों और ड्रोनों को नष्ट किया।
- कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर ड्रोन हमले में 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।
- बहरीन में हमले की चेतावनी के सायरन बजाए गए ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।
- ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह के युद्धविराम समझौते को मानने से मना कर दिया है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गज़ा से मरीजों को बाहर निकालने का काम अभी रोक दिया है।




