लेबनान में सुरक्षा के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इसराइल ने 10 जून 2026 को लेबनान के एक और गांव को जबरन खाली करने का नया आदेश जारी कर दिया है। इससे पहले 9 जून को दक्षिण लेबनान के ऐतिहासिक शहर टायर (Tyre) और उसके ऐतिहासिक ईसाई इलाके को भी खाली करने के लिए कहा गया था। इस अचानक आए आदेश के बाद स्थानीय निवासियों और शरणार्थी शिविरों में रहने वाले लोगों में भारी दहशत फैल गई है और लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में उत्तर की ओर भाग रहे हैं।
टायर शहर और उसके आसपास के इलाकों में क्या हुआ?
इसराइली सेना ने दक्षिण लेबनान के तटीय शहर टायर के निवासियों और फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविरों के लोगों को ज़हरानी नदी के उत्तर की ओर जाने का निर्देश दिया है। यह पहली बार है जब इस ऐतिहासिक ईसाई बहुल इलाके को खाली करने के लिए सीधे तौर पर आदेश दिया गया है। हाल ही में इस क्षेत्र में हुए हवाई हमलों में कम से कम 8 लोगों की मौत हो चुकी है और मलबे से बचे लोगों को निकालने का काम जारी है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल अक्टूबर से अब तक लेबनान में लगभग 12 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और बड़ी आबादी भुखमरी के संकट से जूझ रही है।
इस विस्थापन और सैन्य कार्रवाई पर क्या कहते हैं नियम और अधिकारी?
इस पूरे मामले पर विभिन्न पक्षों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपनी बात रखी है जिसे समझना जरूरी है:
- मानवाधिकार संगठन: ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने कहा है कि बिना किसी निश्चित वापसी तिथि के शिया समुदायों को उनके घरों से हटाना और उन्हें रोकना जबरन विस्थापन की श्रेणी में आता है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत एक युद्ध अपराध है।
- इसराइली प्रशासन: इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा शर्तें पूरी होने तक शिया निवासियों को वापस लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिण लेबनान पर कब्जे को स्थाई घोषित किया है और सीमावर्ती गांवों में तेजी से घरों को गिराने का आदेश दिया है।
- हिजबुल्लाह: हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने दक्षिण लेबनान से अपने लड़ाकों को वापस बुलाने के किसी भी समझौते को साफ तौर पर खारिज कर दिया है और इसे आत्मसमर्पण बताया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इसराइल ने लेबनान के लोगों को किस क्षेत्र से जाने के लिए कहा है?
इसराइल ने दक्षिण लेबनान के टायर शहर, उसके ऐतिहासिक ईसाई इलाके और अन्य पड़ोसी गांवों के लोगों को ज़हरानी नदी के उत्तर की ओर जाने का निर्देश दिया है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस कार्रवाई को लेकर क्या चिंता जताई है?
ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि लोगों को उनके घरों से जबरन हटाना और उन्हें वापस आने से रोकना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार युद्ध अपराध के दायरे में आता है।