24 मई 2026 को उत्तरी इसराइल में अचानक हवाई खतरा बढ़ने के बाद इसराइली सेना ने आसमान में संदिग्ध लक्ष्यों को मार गिराने के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलें दागीं। सेना को आशंका थी कि सीमा पार से लड़ाकू ड्रोन या विमान इसराइली हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए हैं। इसके बाद अदमित और श्लोमी जैसे सीमावर्ती इलाकों में हवाई खतरे के सायरन बजने लगे।
इसराइली सेना ने क्यों दागीं इंटरसेप्टर मिसाइलें?
इसराइली सेना (IDF) ने टेलीग्राम पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना की जानकारी दी। सेना ने बताया कि उत्तरी इसराइल के आसमान में कुछ संदिग्ध हवाई लक्ष्य दिखाई दिए थे, जिसके बाद तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए इंटरसेप्टर मिसाइलों को लॉन्च किया गया। हालांकि, बाद में उन संदिग्ध हवाई लक्ष्यों से संपर्क टूट गया। सेना का मानना है कि ये संदिग्ध ड्रोन या तो सफलतापूर्वक मार गिराए गए या फिर वे इसराइली सीमा से बाहर चले गए। इस सुरक्षात्मक कार्रवाई में किसी भी तरह के नुकसान या किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं है।
हिजबुल्लाह के हमलों के बीच अलर्ट पर डिफेंस सिस्टम
यह सुरक्षा अलर्ट ऐसे समय में आया है जब सीमा पार लेबनान से लगातार रॉकेट और ड्रोन हमले हो रहे हैं। इसराइल के रक्षा उपकरणों का निर्माण करने वाली कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स के चेयरमैन युवाल स्टीनीट्स ने बताया कि इसराइल के पास मिसाइल इंटरसेप्टर का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उनका आयरन डोम सुरक्षा सिस्टम दुश्मनों के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में 99 प्रतिशत तक असरदार साबित हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
उत्तरी इसराइल में हवाई घुसपैठ की यह घटना कब हुई थी?
उत्तरी इसराइल में हवाई घुसपैठ की यह घटना 24 मई 2026 को दर्ज की गई थी, जिसके बाद इसराइली सेना ने मिसाइलें लॉन्च कीं।
क्या इस हवाई खतरे के दौरान कोई नुकसान हुआ है?
इसराइली सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस हवाई घटना के दौरान किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं मिली है।