इसराइल और लेबनान के बीच जारी भारी गोलाबारी और जंग को रोकने के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के वॉशिंगटन में दोनों देशों के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद सीजफायर यानी युद्धविराम को लागू करने के लिए सहमति बन गई है। बुधवार, 3 जून 2026 को हुई इस बातचीत के बाद दोनों देशों ने इस ऐतिहासिक समझौते की पुष्टि की है। हालांकि, जमीन पर अभी भी तनाव बरकरार है और समझौते को पूरी तरह लागू करने के लिए बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं।
🚨: कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले का वीडियो आया सामने, 1 भारतीय की मौत के बाद कुवैत ने उठाया बड़ा कदम।
सीजफायर लागू करने के लिए क्या रखी गई हैं मुख्य शर्तें?
इस समझौते को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण शर्तें तय की गई हैं, जिनका पालन दोनों पक्षों को करना होगा।
- Hezbollah की वापसी: सीजफायर तभी पूरी तरह लागू माना जाएगा जब ईरान समर्थित संगठन Hezbollah इसराइल पर हमले पूरी तरह बंद कर देगा और दक्षिणी लेबनान के South Litani Sector से अपने लड़ाकों को पीछे हटा लेगा।
- लेबनान सेना का नियंत्रण: दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि लेबनान की सेना यानी Lebanese Armed Forces उन संवेदनशील इलाकों का नियंत्रण अपने हाथ में लेगी, जहां से गैर-सरकारी सशस्त्र संगठनों को हटाया जाएगा।
- अगली बैठक की तारीख: इस समझौते को एक व्यापक रूप देने के लिए राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर अगले दौर की सीधी बातचीत 22 जून 2026 को शुरू की जाएगी।
अधिकारियों और नेताओं ने इस फैसले पर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार, 1 जून 2026 को ही यह संकेत दे दिए थे कि दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए राजी हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इसराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu बेरूत पर बड़ा हमला रोकने और Hezbollah पर गोलाबारी बंद करने के लिए मान गए थे, जिसके बदले में Hezbollah ने भी इसराइल पर हमले रोकने का वादा किया था।
अमेरिका में इसराइल के राजदूत Yechiel Leiter ने साफ किया है कि यह सीजफायर तभी तक चलेगा जब तक इसराइल पर हमले पूरी तरह बंद रहेंगे और Hezbollah के आतंकी ढांचे को खत्म किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, Hezbollah के अधिकारी Mahmud Qomati ने मंगलवार, 2 जून 2026 को बयान दिया था कि वे किसी भी अधूरे समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे और वे वॉशिंगटन में हुई इस सीधी बातचीत का हिस्सा नहीं थे।
समझौते के बीच भी क्यों जारी रहे दोनों तरफ से हमले?
इस समझौते के बावजूद सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ है। 3 जून 2026 को भी दोनों ओर से हमले जारी रहे। Hezbollah ने इसराइली सैनिकों पर रॉकेट दागने का दावा किया, जबकि इसराइल के हवाई हमलों में दक्षिणी लेबनान में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई।
इससे पहले भी 17 अप्रैल 2026 को एक युद्धविराम की कोशिश की गई थी, लेकिन दोनों तरफ से हुए उल्लंघनों के कारण वह कभी लागू नहीं हो सकी। बता दें कि यह पूरी जंग 2 मार्च 2026 को शुरू हुई थी, जब Hezbollah ने ईरान के समर्थन में इसराइल पर दोबारा हमले शुरू कर दिए थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इसराइल और लेबनान के बीच सीजफायर पर सहमति कब बनी है?
दोनों देशों के बीच बुधवार, 3 जून 2026 को वॉशिंगटन में हुई चौथे दौर की सीधी बातचीत के बाद सीजफायर लागू करने पर सहमति बनी है।
सीजफायर के लिए सबसे बड़ी शर्त क्या रखी गई है?
सबसे बड़ी शर्त यह है कि Hezbollah को इसराइल पर हमले रोकने होंगे और दक्षिणी लेबनान के South Litani Sector से अपने लड़ाकों को पूरी तरह बाहर करना होगा।
अगली बातचीत कब होने वाली है?
इस समझौते को पूरी तरह से लागू करने और राजनीतिक मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच 22 जून 2026 को फिर से बैठक होने वाली है।
