लेबनान और इसराइल के बीच छिड़ी जंग में एक नया मोड़ आया है। इसराइल ने शुक्रवार को लेबनान में फायरिंग रोकने का ऐलान किया, लेकिन उसकी सेना वहां से पीछे नहीं हटेगी। अमेरिका, कतर और ईरान की मध्यस्थता के बाद एक नए ceasefire समझौते पर सहमति बनी है।
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इसराइल की सेना (IDF) ने साफ कर दिया है कि वह लेबनान के दक्षिणी इलाके में अपनी मौजूदगी बरकरार रखेगी। 18 जून को जारी किए गए एक मैप के मुताबिक, इसराइली सेना लेबनान की सीमा के अंदर करीब 10 किलोमीटर तक तैनात रहेगी। यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते के बावजूद लिया गया है।
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 19 जून को बयान दिया कि जब तक खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, उनकी सेना लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम उत्तरी इलाकों में रहने वाले समुदायों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। इसराइल ने लेबनान की सेना (LAF) से भी इस दौरान तालमेल बिठाने को कहा है।
हालांकि, यह शांति समझौता पूरी तरह कामयाब नहीं दिख रहा है। 20 जून को IDF के प्रवक्ता Brigadier General Effie Defrin ने बताया कि Hezbollah की तरफ से ceasefire का उल्लंघन किया गया, जिसमें 4 इसराइली सैनिक मारे गए। उन्होंने साफ किया कि सेना खतरों को हटाने और जवाब देने के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखेगी।
दूसरी तरफ, Hezbollah का कहना है कि लेबनान की जमीन पर इसराइल की सेना का होना समझौते का उल्लंघन है। इस तनाव की वजह से ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली तकनीकी बातचीत में भी देरी कर दी है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इसराइल आने वाले समय में भी Hezbollah के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
इस पूरे संघर्ष में अब तक लेबनान में 47 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इसराइल के 4 सैनिकों की जान गई है।