इजरायल और लेबनान के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें तेज हो गई हैं। सऊदी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को दोनों देशों के बीच युद्ध विराम का ऐलान हो सकता है। हालांकि, जमीनी हालात को देखें तो दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर अभी भी काफी मतभेद हैं और तनाव बना हुआ है।

क्या शनिवार को सच में रुक जाएगी जंग?

सऊदी न्यूज़ के ट्वीट में कहा गया है कि दुनिया भर के देशों की कोशिशों से शनिवार को युद्ध विराम हो सकता है। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक उत्तर इजरायल में पूरी सुरक्षा नहीं मिल जाती, तब तक युद्ध विराम नहीं होगा। उन्होंने बातचीत शुरू करने का निर्देश तो दिया है, लेकिन यह भी साफ किया कि यह बातचीत गोलाबारी और सैन्य कार्रवाई के बीच ही चलेगी।

लेबनान और अन्य देशों का इस पर क्या कहना है?

लेबनान ने इजरायल की इस शर्त को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह हमलों के बीच कोई बातचीत नहीं करेगा। लेबनान की मांग है कि पहले युद्ध विराम हो ताकि आगे की चर्चा की जा सके। इस मामले को सुलझाने के लिए अमेरिका अगले हफ्ते वॉशिंगटन में एक बैठक आयोजित करेगा, जिसमें लेबनान और इजरायल के प्रतिनिधि शामिल होंगे। वहीं, ईरान और इराक भी अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं कि वह इजरायल को हमले रोकने के लिए मजबूर करे।

विभिन्न देशों और नेताओं का आधिकारिक रुख

देश/नेता मुख्य स्टैंड/बयान
इजरायल सुरक्षा मिलने तक युद्ध विराम नहीं, बातचीत गोलाबारी के बीच होगी।
लेबनान हमले के बीच बातचीत मंजूर नहीं, पहले युद्ध विराम जरूरी है।
अमेरिका अगले हफ्ते वॉशिंगटन में सीधी बातचीत कराएगा, ट्रम्प ने हमले कम करने को कहा।
ईरान अमेरिका से मांग की कि लेबनान को भी युद्ध विराम समझौते में शामिल किया जाए।
सऊदी अरब अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया और लेबनान की स्थिति पर चर्चा की।
फ्रांस चाहता है कि युद्ध विराम का लाभ पूरे लेबनान को मिले।
ब्रिटेन इजरायली हमलों को विनाशकारी बताया और जल्द शांति की अपील की।