लेबनान में शांति की उम्मीदों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच दो हफ्ते के सीज़फायर समझौते की खबरों के बावजूद इसराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों को खाली करने की नई धमकी दे दी है। इस घोषणा के बाद से विस्थापित परिवारों के बीच काफी उलझन और डर पैदा हो गया है क्योंकि समझौते के बाद लोगों को शांति की उम्मीद थी।

सीज़फायर के दावों और हकीकत में क्या अंतर है?

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर पाकिस्तान ने संकेत दिया था कि इसमें लेबनान में जारी जंग भी शामिल है। हालांकि, इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर ने साफ कर दिया है कि यह समझौता हिजबुल्लाह के साथ चल रहे संघर्ष पर लागू नहीं होता है। इस विरोधाभास की वजह से आम जनता काफी परेशान है। इसराइली रक्षा मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा, तब तक विस्थापित लोगों को वापस लौटने नहीं दिया जाएगा।

लेबनान संकट से जुड़ी कुछ मुख्य जानकारियां

  • लेबनान की क्राइसिस मैनेजमेंट यूनिट ने विस्थापित लोगों से फिलहाल दक्षिण की ओर न जाने की अपील की है क्योंकि वहां हमले जारी हैं।
  • मिस्र ने इसराइल से लेबनान पर अपने हमले तुरंत रोकने की मांग की है ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
  • लेबनान में अब तक 10 लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर जाने को मजबूर हुए हैं।
  • हालिया हमलों में बेरूत के पास राफिक हरीरी यूनिवर्सिटी अस्पताल के पास भी हमला हुआ है जिसमें कई लोगों की जान गई है।
  • संयुक्त राष्ट्र के जानकारों ने इसराइल के इस विस्थापन के तरीके को लेकर चिंता जताई है और इसे युद्ध अपराधों से जोड़कर देखा जा रहा है।
  • हिजबुल्लाह ने फिलहाल सीज़फायर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और वह इन हमलों को आत्मरक्षा बता रहा है।