लेबनान के दक्षिणी हिस्से में जारी इजराइली हमलों को रोकने के लिए दुनिया के 10 देशों ने एक साथ आवाज उठाई है। कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत इन देशों ने मांग की है कि हमलों को तुरंत रोका जाए और वहां काम कर रहे राहत कर्मियों को सुरक्षित रखा जाए। यह अपील ऐसे समय में आई है जब लेबनान में मानवीय हालात बहुत खराब हो चुके हैं और लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं।

शांति के लिए किन देशों ने क्या अपील की?

15 अप्रैल 2026 को कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, जापान और जॉर्डन जैसे 10 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इन देशों ने इजराइली हमलों को तुरंत खत्म करने और मानवीय सहायता पहुंचाने वाले लोगों की सुरक्षा की मांग की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई।

इससे पहले 14 अप्रैल को 17 अन्य देशों ने भी लेबनान के मामले में हस्तक्षेप किया। इन देशों ने 8 अप्रैल को हुए उन बड़े हमलों की निंदा की जिसमें 350 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। उन्होंने लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने और शांति के लिए राजनीतिक हल निकालने की बात कही।

बयान का प्रकार शामिल मुख्य देश
10 देशों का बयान ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, सिएरा लियोन, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन
17 देशों का बयान ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, साइप्रस, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, आइसलैंड, लक्समबर्ग, माल्टा, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, ब्रिटेन

जमीनी हालात और सीधी बातचीत का क्या अपडेट है?

दशकों बाद पहली बार 15 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन डी.सी. में लेबनान और इजराइल के बीच सीधी बातचीत हुई। अमेरिका ने इस बातचीत में बीच का रास्ता निकालने में मदद की। संयुक्त राष्ट्र ने इसे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में पहला कदम बताया। हालांकि, हिजबुल्ला के नेता ने इस बातचीत को बेकार बताते हुए इससे अलग रहने की सलाह दी।

वहीं, दक्षिणी लेबनान के बिंत जबेल (Bint Jbeil) शहर में भारी लड़ाई की खबर आई है। इजराइली सेना आगे बढ़ रही है और हिजबुल्ला की तरफ से रॉकेट दागे जा रहे हैं। इस जंग की वजह से लेबनान में मानवीय संकट गहरा गया है। करीब 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें लगभग 4 लाख बच्चे शामिल हैं।

राहत कर्मियों और आम लोगों पर क्या असर पड़ा?

युद्ध के बीच मदद पहुंचाने वाले पैरामेडिक्स और सहायता कर्मियों की जान को खतरा बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कई बार संयुक्त राष्ट्र के साथ तालमेल होने के बावजूद राहत कर्मियों पर हमले हुए। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन न होने की वजह से भोजन, पानी और दवाओं की सप्लाई मुश्किल हो गई है।

विस्थापित लोगों के लिए रहने की जगह और मनोवैज्ञानिक सेवाओं की भारी कमी है। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आम नागरिकों और अस्पतालों जैसे बुनियादी ढांचे को हमलों से बचाया जाए ताकि और ज्यादा जान-माल का नुकसान न हो।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.