इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ सीधी बातचीत शुरू करने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने अपनी कैबिनेट को निर्देश दिया है कि बातचीत का रास्ता तुरंत खोला जाए ताकि क्षेत्र में शांति बन सके। लेबनान के राष्ट्रपति ने भी इसे मौजूदा संकट का एकमात्र समाधान बताया है और कहा है कि वे कूटनीतिक रास्ता अपना रहे हैं।

बातचीत की शुरुआत और मुख्य लक्ष्य

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 8 अप्रैल को अपनी कैबिनेट को निर्देश दिए थे कि लेबनान के साथ सीधी बातचीत शुरू की जाए। इस फैसले के पीछे लेबनान की लगातार की जा रही अपीलों को मुख्य वजह बताया गया है। इस पूरी बातचीत के दौरान इसराइल कुछ खास मुद्दों पर ध्यान देगा।

  • हिजबुल्लाह का पूरी तरह से निशस्त्रीकरण करना मुख्य शर्त होगी।
  • इसराइल और लेबनान के बीच स्थायी शांति संबंध स्थापित करना।
  • लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम के बेरूत को सेना मुक्त करने के प्रस्ताव पर चर्चा।
  • लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन की तरफ से शांति और युद्धविराम की कोशिशें।

मौजूदा स्थिति और अन्य देशों की भूमिका

इस घोषणा के बीच लेबनान में स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में हुए हमलों में काफी जान-माल का नुकसान हुआ है और बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

देश या नेता मुख्य अपडेट और बयान
जोसेफ औन (लेबनान राष्ट्रपति) सीधी बातचीत ही शांति का एकमात्र रास्ता है।
डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिका) इसराइल से लेबनान में हमले कम करने का आग्रह किया है।
एंथनी अल्बनीज़ (ऑस्ट्रेलिया) लेबनान में तुरंत युद्धविराम की मांग की है।
विस्थापन अपडेट मार्च से अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग सीरिया भाग चुके हैं।

अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल लेबनान किसी बड़े युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है लेकिन राजनयिक कोशिशें लगातार जारी हैं। लेबनान इस पूरे मामले की शिकायत संयुक्त राष्ट्र में भी करने की योजना बना रहा है।