वाशिंगटन डीसी में इसराइल और लेबनान के बीच दशकों बाद पहली बार सीधी बातचीत शुरू हुई है। इस बड़ी मीटिंग में अमेरिका मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन फ़्रांस को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इसराइल ने साफ़ तौर पर फ़्रांस की भागीदारी को मना कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है।

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इसराइल ने फ़्रांस को बातचीत से बाहर क्यों किया?

इसराइल का मानना है कि फ़्रांस पिछले एक साल से निष्पक्ष नहीं रहा है, इसलिए वह इस बातचीत के लिए सही मध्यस्थ नहीं है। इसराइल ने इसके पीछे कई मुख्य कारण बताए हैं:

  • फ़्रांस ने ईरान के खिलाफ इसराइल की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने की कोशिश की।
  • लेबनान में हिज़्बुल्लाह को निहत्था करने के लिए फ़्रांस ने कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाई।
  • फ़्रांस ने अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से हथियार ले जाने की अनुमति देने से मना कर दिया।
  • फ़्रांस ने लेबनान में इसराइल के जमीनी ऑपरेशन के खिलाफ दबाव बनाया।

बातचीत का क्या मकसद है और हिज़्बुल्लाह का क्या कहना है?

लेबनान की प्रेसिडेंसी के मुताबिक, इन बातचीत का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम (ceasefire) करना और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय चर्चा शुरू करना है। हालांकि, हिज़्बुल्लाह और उसके समर्थक इस सीधी बातचीत का विरोध कर रहे हैं।

हिज़्बुल्लाह के महासचिव नईम कासेम ने मांग की है कि 2024 वाले पुराने समझौते पर लौटा जाए, जिसमें अमेरिका, फ़्रांस और यूनाइटेड नेशंस की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष बातचीत होती थी। इस बीच, बातचीत शुरू होते ही हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं।

फ़्रांस और अमेरिका का इस पर क्या रुख है?

अमेरिका इस समय इन ऐतिहासिक बातचीत का नेतृत्व कर रहा है। दूसरी तरफ, फ़्रांस ने इसराइल के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक फ्रांसीसी राजनयिक ने कहा कि उनका मकसद मीटिंग में शामिल होना नहीं, बल्कि यह है कि इसराइल लेबनान पर हमले बंद करे।

फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने कहा कि लेबनान पर हो रहे हमले बर्दाश्त के बाहर हैं और किसी भी युद्धविराम में लेबनान का होना जरूरी है। वहीं, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी युद्धविराम की वकालत की है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना शर्त खोलने की मांग की है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.