Israel Lebanon Talks: 34 साल बाद आमने-सामने हुए इसराइल और लेबनान के नेता, Trump ने दी जानकारी
करीब 34 साल के लंबे इंतजार के बाद इसराइल और लेबनान के नेताओं ने वॉशिंगटन डी.सी. में सीधी बातचीत की। इसकी जानकारी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और शांति का रास्ता बनाने का एक बड़ा मौका बताया।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ और क्या रही मुख्य बातें?
इस मीटिंग की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने की। इसराइल की तरफ से प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और राजदूत Yechiel Leiter शामिल हुए। वहीं लेबनान की ओर से राष्ट्रपति Joseph Aoun, प्रधानमंत्री Nawaf Salam और राजदूत Nada Hamadeh Moawad ने हिस्सा लिया। अमेरिकी राजदूत Michel Issa ने भी इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। अमेरिका ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया लेकिन यह भी कहा कि शांति की यह प्रक्रिया समय लेगी।
दोनों देशों की क्या मांगें और शर्तें हैं?
इसराइल का कहना है कि वह Hezbollah के हथियारों को पूरी तरह खत्म करना चाहता है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी शांति समझौता हो सके। इसराइल ने यह भी साफ किया कि वह Hezbollah पर हमले बंद नहीं करेगा। दूसरी तरफ लेबनान ने तुरंत युद्धविराम, दक्षिणी लेबनान से इसराइली सेना की वापसी और कैदियों की रिहाई की मांग रखी है। लेबनान विस्थापित लोगों की वापसी और टूटे हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर भी जोर दे रहा है।
कौन है इस बातचीत के खिलाफ और क्या है मौजूदा स्थिति?
ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने इस सीधी बातचीत का खुला विरोध किया है। इस संगठन का बैठक में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था और उसने साफ कर दिया कि वह इन वार्ताओं के दौरान होने वाले किसी भी समझौते को नहीं मानेगा। राजनयिक कोशिशों के बावजूद जमीन पर हालात तनावपूर्ण हैं और इसराइली सेना व Hezbollah के बीच भारी लड़ाई जारी है, जिससे दक्षिणी लेबनान में कई लोग बेघर हो गए हैं।
| पक्ष/संगठन | मुख्य प्रतिनिधि | मुख्य उद्देश्य/स्टैंड |
|---|---|---|
| Israel | Benjamin Netanyahu | Hezbollah के हथियारों को खत्म करना और स्थायी शांति |
| Lebanon | Joseph Aoun | तत्काल युद्धविराम और सेना की वापसी |
| United States | Marco Rubio | बातचीत की मध्यस्थता और सुविधा प्रदान करना |
| Hezbollah | शामिल नहीं | बातचीत का विरोध और समझौते को न मानने का ऐलान |