इसराइल की सेना ने लेबनान के दक्षिण इलाके कफ़रकेला में एक तैयार लॉन्चर पर हमला किया है. यह कार्रवाई तब हुई जब दोनों देशों के बीच 10 दिनों का संघर्ष-विराम चल रहा था. इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ गया है और शांति समझौते की मजबूती पर अब सवाल उठने लगे हैं.

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क्या है यह ‘येलो लाइन’ और हमले की वजह

इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी सुरक्षा के लिए एक काल्पनिक सीमा तय की है, जिसे ‘येलो लाइन’ कहा जाता है. इसराइल की सेना ने बताया कि जिस लॉन्चर को नष्ट किया गया, वह इसी येलो लाइन के उत्तर में मौजूद था. इसराइल इस रेखा का इस्तेमाल हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को खत्म करने और अपनी रक्षात्मक स्थिति मजबूत करने के लिए कर रहा है. इस योजना के तहत करीब 55 लेबनानी गाँवों के निवासियों को उनके घरों में लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

संघर्ष-विराम की स्थिति और तनाव

अमेरिका की मध्यस्थता में 16 अप्रैल 2026 को शाम 5:00 बजे से 10 दिनों का संघर्ष-विराम लागू हुआ था. इसका मुख्य उद्देश्य सक्रिय लड़ाई को रोकना था ताकि लंबी अवधि के समाधान के लिए बातचीत हो सके. हालांकि, इस समझौते के बाद भी हिंसा नहीं रुकी है. 19 अप्रैल को हिजबुल्लाह ने इसराइल के बख्तरबंद वाहनों पर हमला किया था, वहीं लेबनान के कई गाँवों में इसराइली धमाकों की खबरें सामने आईं. संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से समझौते का सम्मान करने को कहा है.

मुख्य विवरण जानकारी
हमले की तारीख 20 अप्रैल 2026 की रात
हमले का स्थान कफ़रकेला, दक्षिण लेबनान
संघर्ष-विराम की शुरुआत 16 अप्रैल 2026
मध्यस्थ देश संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
नियंत्रण रेखा का नाम येलो लाइन (Yellow Line)
प्रभावित गाँव 55 लेबनानी गाँव
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.