इसराइल और लेबनान के बीच जारी तनाव ने अब एक भयानक मोड़ ले लिया है. 8 अप्रैल 2026 को इसराइली सेना ने लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ ‘ऑपरेशन इटरनल डार्कनेस’ (Operation Eternal Darkness) नाम से एक बहुत बड़ा हवाई हमला शुरू किया. यह हमला उस वक्त हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा हुई थी. इसराइल के इस कदम से मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है और लेबनान के कई शहरों में धुएं का गुबार देखा जा रहा है.

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क्या है ऑपरेशन इटरनल डार्कनेस और इसराइल का इस पर क्या कहना है?

इसराइल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि इस बड़े हमले की योजना कई हफ्ते पहले ही बना ली गई थी. इसराइल का तर्क है कि ईरान के साथ हुआ कोई भी समझौता लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ उसकी कार्रवाई को नहीं रोक सकता. रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने इसे हिजबुल्ला पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया है कि उत्तरी इसराइल के निवासियों की सुरक्षा के लिए वे पीछे नहीं हटेंगे. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन का मकसद युद्धविराम लागू होने से पहले हिजबुल्ला की ताकत को पूरी तरह खत्म करना था.

हमले से जुड़ी मुख्य जानकारियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस सैन्य अभियान के दौरान लेबनान के घने इलाकों में भारी बमबारी की गई है, जिससे आम नागरिकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मुख्य तथ्यों को नीचे विस्तार से दिया गया है:

  • हमले की रफ्तार: इसराइल ने केवल 10 मिनट के भीतर बेरुत, बेका घाटी और दक्षिणी लेबनान में 100 से अधिक जगहों पर मिसाइलें दागीं.
  • मृतकों की संख्या: अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में 70 से लेकर 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हैं.
  • लेबनान का पक्ष: लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इसे ‘नृशंस’ हमला बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की अपील की है.
  • अमेरिका और ईरान: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान की स्थिति को एक अलग झड़प बताया है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले नहीं रुके तो वह शांति समझौते से बाहर हो जाएगा.

हिजबुल्ला ने भी इस हमले के जवाब में शाम के वक्त इसराइल के गैलिली इलाके में रॉकेट दागे हैं. लेबनान के अधिकारियों ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि जब तक आधिकारिक तौर पर पूरी तरह युद्धविराम की घोषणा न हो जाए, तब तक वे दक्षिणी इलाकों की ओर न जाएं.