इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने लेबनान के साथ एक स्थायी शांति समझौते की इच्छा जताई है। उन्होंने साफ़ किया कि इसराइल शांति चाहता है लेकिन इसके लिए उन्होंने कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत अब वाशिंगटन में होने वाली है जिससे इस क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।

शांति समझौते के लिए इसराइल की क्या शर्तें हैं?

प्रधानमंत्री Netanyahu ने 11 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि इसराइल एक ऐसे समझौते के पक्ष में है जो आने वाली कई पीढ़ियों तक चले। हालांकि, उन्होंने इसराइल की मंजूरी के लिए दो मुख्य शर्तें रखी हैं। पहली शर्त हिजबुल्लाह (Hezbollah) का पूरी तरह से निशस्त्र होना है और दूसरी एक वास्तविक शांति समझौता करना है। उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि फिलहाल लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है और इसराइल हिजबुल्लाह पर अपने हमले जारी रखेगा।

वाशिंगटन में होने वाली बातचीत और मुख्य पक्षों का रुख

इसराइल और लेबनान के दूतों के बीच औपचारिक बातचीत अगले हफ्ते मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को Washington D.C. में शुरू होगी। इस मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं के विचार नीचे दी गई टेबल में दिए गए हैं:

व्यक्ति/देश मुख्य बयान/रुख
Benjamin Netanyahu स्थायी शांति चाहते हैं लेकिन हिजबुल्लाह का निशस्त्रीकरण जरूरी है।
Joseph Aoun लड़ाई रोकने के लिए इसराइल के साथ सीधे बातचीत के लिए तैयार हैं।
Nawaf Salam हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
Donald Trump तनाव कम करने की कोशिश और नेतन्याहू को हमले घटाने की सलाह दी।
Yechiel Leiter शांति वार्ता पर सहमति लेकिन हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम पर चर्चा से इनकार।
Masoud Pezeshkian कहा कि इसराइल के हमले शांति बातचीत को नुकसान पहुँचाएंगे।
Ghalibaf (ईरान) युद्धविराम और जमी हुई संपत्ति की वापसी के बिना बातचीत नहीं करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और वर्तमान स्थिति

इस मामले में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और पुष्टि की कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम समझौते में लेबनान को भी शामिल किया गया था। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने दक्षिण सीमा के लिए एक दीर्घकालिक व्यवस्था की इच्छा जताई है। दूसरी ओर, इसराइल ने स्पष्ट किया है कि ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ उनका सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.