इजराइल-लेबनान के बीच रोम में फिर शुरू हुई शांति वार्ता, हिजबुल्लाह के हथियार छोड़ने पर फंसा पेच

इजराइल और लेबनान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। इटली की राजधानी रोम में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने आमने-सामने बैठकर बातचीत का नया दौर शुरू किया है। 04 अगस्त को हुई यह बैठक मार्च के महीने में शुरू हुए इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष के बाद से सातवीं सीधी मुलाकात है। इसका मुख्य मकसद सीमा पर बसे इलाकों में अमन-चैन बहाल करना और सुरक्षा को पुख्ता करना है।
शांति वार्ता में हिजबुल्लाह का अड़ंगा
एक तरफ जहां शांति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने इस बातचीत को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि इस तरह की चर्चाओं से लेबनान को सिर्फ निराशा और अपमान ही हाथ लगेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन अपने हथियार सौंपने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है, जो कि इस बातचीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।
लेबनान सरकार की नाराजगी
हिजबुल्लाह के इस बयान पर लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश को सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों ने पहुंचाया है, जिन्होंने बिना किसी ठोस लाभ के एकतरफा फैसले लिए और लेबनान को जंग की आग में झोंक दिया। उनके मुताबिक, ऐसी हरकतों ने इजराइल को हमले करने का मौका दे दिया, जिससे आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
पहले बनी थी रूपरेखा, अब रुकावट जारी
बीते जून महीने में दोनों पक्षों के बीच एक रूपरेखा तैयार की गई थी, जिस पर सहमति बनी थी। इस योजना के तहत हिजबुल्लाह के हथियार छोड़ने, दक्षिणी लेबनान से इजराइली सैनिकों की वापसी और वहां लेबनानी सेना तैनात करने का प्रस्ताव था। हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी इस मसले पर गतिरोध बना हुआ है क्योंकि हिजबुल्लाह ने पूरी तरह से अपने हथियार देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक दबाव के जरिए सीमावर्ती इलाकों में शांति लौट पाएगी या यह विवाद और लंबा खिंचेगा।