इसराइल और लेबनान के बीच युद्ध विराम के कुछ ही घंटों बाद फिर से भीषण हिंसा शुरू हो गई है। इसराइल ने लेबनान के बेका और टायर इलाकों में जोरदार हमले किए हैं, जिसमें बड़ी संख्या में आम लोग और सैनिक मारे गए हैं। इस तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है क्योंकि ईरान ने भी प्रतिक्रिया देते हुए एक बड़ा कदम उठाया है।

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यह हमले 19 और 20 जून 2026 को हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में हुए इन हमलों में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 26 लोग घायल हुए। टायर जिले के बारीश में एक तीन मंजिला रिहायशी इमारत पर हमला हुआ, जिसमें माता-पिता और दो बच्चों समेत एक ही परिवार के चार लोगों की जान चली गई। इसके अलावा, पश्चिमी बेका के सोहमोर में ड्रोन हमले में एक व्यक्ति मारा गया और सिडोन के पास एक गांव में हुए हमले में 7 लोगों की मौत और 13 लोग घायल हुए। इस हिंसा में लेबनान की सेना का एक जवान भी मारा गया है।

हमलों की वजह और आधिकारिक बयान

इसराइल की सेना ने कहा कि उन्होंने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया। इसराइल का दावा है कि हिजबुल्लाह ने सीज़फायर समझौते का उल्लंघन करते हुए रात भर में 50 से ज्यादा प्रोजेक्टाइल दागे थे। इसराइल ने साफ किया कि उनका मकसद केवल खतरों को खत्म करना है, आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं।

दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह ने इसराइल पर सीज़फायर के पहले ही पल से उसका उल्लंघन करने का आरोप लगाया। हिजबुल्लाह का कहना है कि इसराइल रणनीतिक इलाकों में घुसपैठ की कोशिश कर रहा है और वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। लेबनानी सशस्त्र बलों ने भी बयान जारी कर कहा कि ये हमले बहुत बड़े इलाके में हुए हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और यह स्थिरता के रास्ते में बाधा है।

दुनिया पर असर और ईरान का फैसला

इस लड़ाई का असर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखने लगा है। इसराइल के हमलों के जवाब में ईरान ने 20 जून को होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ हुए अंतरिम शांति समझौते का उल्लंघन हुआ है।

  • बैंक पर हमला: इसराइल के हवाई हमले में लेबनान के सेंट्रल बैंक की नबतीह शाखा पूरी तरह तबाह हो गई।
  • वार्ता में देरी: लेबनान में बढ़ते तनाव के कारण स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली तकनीकी बातचीत को टाल दिया गया है।
  • सीज़फायर का उल्लंघन: 19 जून की शाम 4 बजे से युद्ध विराम लागू होना था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद हमले शुरू हो गए।