इज़राइल और लेबनान के बीच दशकों बाद पहली बार सीधे राजनयिक स्तर पर बातचीत हुई है। अमेरिका की मध्यस्थता में वाशिंगटन डी.सी. में हुई इस बैठक के बाद इज़राइल के राजदूत येहियल लाइटर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान की सरकार अब हिज़्बुल्लाह के प्रभाव और उसके कब्जे से मुक्त होना चाहती है।

वाशिंगटन में क्या हुई चर्चा और किसने लिया हिस्सा?

यह महत्वपूर्ण बैठक 14 और 15 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन डी.सी. में हुई। इसमें इज़राइल की तरफ से राजदूत येहियल लाइटर और लेबनान की तरफ से राजदूत नादा हमादेह मोआवद शामिल हुए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस पूरी बातचीत की मध्यस्थता की। इस वार्ता का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच एक स्पष्ट सीमा तय करना और लंबे समय तक शांति बनाए रखना था।

इज़राइल और लेबनान की मांगों में क्या अंतर था?

बातचीत के दौरान दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग रहीं। इज़राइल का पूरा जोर हिज़्बुल्लाह को निहत्था करने पर था, क्योंकि वह इसे स्थायी शांति के लिए जरूरी मानता है। दूसरी तरफ, लेबनान ने तुरंत संघर्ष विराम और मानवीय संकट को दूर करने की मांग की। लेबनानी राजदूत ने आंतरिक शरणार्थियों की वापसी और आम लोगों की तकलीफों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।

हिज़्बुल्लाह और ईरान का इस पर क्या रुख है?

इस पूरी प्रक्रिया का हिज़्बुल्लाह ने कड़ा विरोध किया और लेबनान से इस बैठक को रद्द करने को कहा था। इज़राइल का मानना है कि ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह क्षेत्रीय शांति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। इज़राइल ने यह भी साफ कर दिया कि वह सीधे हिज़्बुल्लाह के साथ किसी संघर्ष विराम पर चर्चा नहीं करेगा।