अमेरिका के वॉशिंगटन में इसराइल और लेबनान के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक बातचीत हुई है। यह मीटिंग अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की देखरेख में हुई, जिसे एक बड़ा मौका माना जा रहा है। इस बातचीत में लेबनान सरकार ने यह साफ़ कर दिया है कि वह अब हिज़्बुल्लाह के प्रभाव में नहीं रहेगी और देश पर अपनी पकड़ मजबूत करेगी।

लेबनान और इसराइल की बातचीत में क्या हुआ?

अमेरिका में हुई इस मीटिंग में इसराइल के राजदूत Yechiel Leiter ने बताया कि लेबनान सरकार अब हिज़्बुल्लाह के कब्जे से बाहर निकलना चाहती है। इस मुद्दे पर कुछ मुख्य बातें सामने आईं:

  • लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने हिज़्बुल्लाह जैसे समूहों से हथियार छीनने का वादा किया है।
  • लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने युद्ध खत्म करने और अपनी जमीन से इसराइली सैनिकों की वापसी की मांग की है।
  • इसराइल ने साफ़ कहा है कि वह हिज़्बुल्लाह के साथ कोई युद्धविराम नहीं करेगा, बल्कि उसका लक्ष्य इस ग्रुप को पूरी तरह निशस्त्र करना है।

हिज़्बुल्लाह का क्या रिएक्शन है और जमीनी हालात क्या हैं?

बातचीत के बावजूद जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। हिज़्बुल्लाह के नेता Naim Qassem ने अमेरिका द्वारा कराई गई इन बातचीत को बेकार बताया है और इसे मानने से इनकार कर दिया है। इसी बीच, 14 अप्रैल को हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल के शहरों और दक्षिणी लेबनान में तैनात इसराइली सैनिकों पर 26 हमले किए। हिज़्बुल्लाह का कहना है कि जब तक इसराइल हमले नहीं रोकता, वे अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे।

दुनिया के अन्य देशों का इस पर क्या रुख है?

कई देशों के विदेश मंत्रियों ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसमें लेबनान सरकार के उस फैसले की तारीफ की गई है जिसमें हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाने की बात कही गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है कि लेबनान की पूरी सत्ता वहां की सरकार के पास हो और हथियारों पर केवल राज्य का ही नियंत्रण रहे ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.