इजराइल-लेबनान शांति वार्ता में फिर फंसा पेंच, हथियार छोड़ने के मामले पर हिजबुल्लाह ने दिखाया कड़ा रुख.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच एक बार फिर से बातचीत का दौर शुरू हो चुका है। इटली की राजधानी रोम में मंगलवार को दोनों देशों के अधिकारियों ने आमने-सामने बैठकर हालात सुधारने पर चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पर शांति और सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पा रहे हैं। मार्च के महीने में जब से इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक दोनों पक्षों के बीच यह सातवीं प्रत्यक्ष बैठक हो रही है, जिससे दुनिया भर की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं।
हिजबुल्लाह ने बातचीत का किया कड़ा विरोध
एक तरफ जहां सरकारें शांति स्थापित करने की कोशिश में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ हिजबुल्लाह संगठन ने इस बातचीत को लेकर अपना तीखा विरोध दर्ज कराया है। हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने साफ शब्दों में कहा है कि इस तरह की बातचीत से लेबनान को केवल अपमान, निराशा और लगातार समझौते ही हाथ लगेंगे। उन्होंने अपने बयान में यह भी संकेत दे दिया है कि उनका संगठन किसी भी कीमत पर अपने हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। हिजबुल्लाह का यह रुख साफ करता है कि सीमावर्ती इलाकों में शांति बहाली का रास्ता अभी भी बहुत कठिन बना हुआ है और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी है।
लेबनान के प्रधानमंत्री ने दिया कड़ा जवाब
हिजबुल्लाह प्रमुख के इस बयान के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को अगर सबसे ज्यादा किसी चीज से नुकसान हुआ है, तो वह उन लोगों के एकतरफा फैसले रहे हैं जिन्होंने लेबनान को ऐसे युद्धों में झोंक दिया जिनका कोई तुक नहीं बनता था। उन्होंने यह भी कहा कि इन गलत फैसलों की वजह से ही इजराइल को लेबनान पर हमले करने का खुला अवसर मिल गया। देश की सरकार चाहती है कि अब हालात सुधरें और क्षेत्र में अमन-चैन कायम हो, लेकिन अंदरूनी कलह और सशस्त्र गुटों के अड़ियल रव्ये के कारण सरकार के प्रयास कमजोर पड़ रहे हैं।
जून में बनी थी एक रूपरेखा पर सहमति
गौरतलब है कि इससे पहले जून के महीने में हुई वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने एक रूपरेखा समझौते पर आपसी सहमति जताई थी। इस समझौते के प्रस्ताव के तहत हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण किया जाना था, दक्षिणी लेबनान से इजराइली सैनिकों को पूरी तरह वापस बुलाना था और उस संवेदनशील क्षेत्र में लेबनानी सेना की तैनाती की जानी थी। हालांकि, हिजबुल्लाह ने इस पूरे समझौते को सिरे से खारिज कर दिया है और अपने हथियार सरकार या सेना को सौंपने से साफ इनकार कर दिया है। इस ताज़ा स्थिति के बारे में अधिक जानकारी आप हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट में देख सकते हैं, जहाँ आकाश कुमार राय ने इसकी पूरी खबर कवर की है।