अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल और लेबनान के बीच 30 साल बाद पहली बार सीधी बातचीत हुई है। यह महत्वपूर्ण मीटिंग मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन डी.सी. में आयोजित की गई। इस मुलाकात का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच बढ़ रहे खून-खराबे को रोकना और क्षेत्र में हिजबुल्ला के प्रभाव को खत्म करना है।
इस मीटिंग में क्या खास बातें हुईं और क्या फैसला लिया गया?
इस बैठक में दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि वे जल्द ही एक ऐसा समय और जगह तय करेंगे जहाँ सीधी बातचीत शुरू की जा सके। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस मुलाकात को एक ऐतिहासिक मौका बताया। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि कोई भी युद्धविराम समझौता केवल इसराइल और लेबनान की सरकारों के बीच ही होगा, किसी अन्य माध्यम से नहीं। इस प्रक्रिया को शांति की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दोनों देशों की अपनी-अपनी क्या मांगें थीं?
मीटिंग के दौरान इसराइल और लेबनान के बीच कुछ बुनियादी मुद्दों पर अलग-अलग राय रही। जहाँ इसराइल ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी, वहीं लेबनान ने मानवीय संकट पर जोर दिया।
| पक्ष | मुख्य मांग और स्टैंड |
|---|---|
| इसराइल | हिजबुल्ला के हथियारों को खत्म करना और मिलिटेंट ढांचे को उखाड़ना |
| लेबनान | तुरंत युद्धविराम, विस्थापित लोगों की वापसी और मानवीय मदद |
| अमेरिका | दोनों सरकारों के बीच सीधा समझौता और स्थायी शांति का ढांचा तैयार करना |
| हिजबुल्ला | बातचीत को पूरी तरह खारिज किया और इसे बेकार बताया |
मौजूदा हालात और अन्य नेताओं का क्या कहना है?
जमीन पर हालात अब भी गंभीर हैं, लेबनान में अब तक 2,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 10 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने उम्मीद जताई कि इन बातचीत से लोगों का दुख कम होगा। दूसरी ओर, हिजबुल्ला के चीफ Naim Qassem ने इस मीटिंग का विरोध किया और कहा कि अब जवाब युद्ध के मैदान में मिलेगा। इस बीच, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि वे लेबनान की request पर बातचीत के लिए तैयार थे।
