इजराइल और लेबनान ने अमेरिका की मदद से एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना और इलाके में शांति लाना है। यह समझौता वॉशिंगटन में हुई लंबी बातचीत के बाद हुआ है ताकि भविष्य में युद्ध की स्थिति को रोका जा सके।

कैसे हुआ यह समझौता

इस समझौते के लिए अप्रैल 2026 में वॉशिंगटन में बातचीत शुरू हुई थी। कुल पांच दौर की चर्चा के बाद 26 जून 2026 को इस त्रिपक्षीय ढांचे पर हस्ताक्षर किए गए। इस दस्तावेज़ पर इजरायली राजदूत Yechiel Leiter, लेबनानी राजदूत Nada Hamadeh Moawad और अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के चीफ ऑफ स्टाफ Dan Holler ने साइन किए। यह फैसला मार्च 2026 में हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल पर किए गए हमले के बाद आए तनावपूर्ण माहौल के बीच लिया गया है।

समझौते की मुख्य बातें

  • लेबनान की संप्रभुता बहाल करने और हिजबुल्लाह के हथियारों को खत्म करने के लिए एक प्रक्रिया बनाई गई है।
  • लेबनानी सेना (LAF) दक्षिण लेबनान के कुछ खास इलाकों का नियंत्रण संभालेगी, जिसके बाद वहां से इजरायली सेना वापस जाएगी।
  • जब तक हिजबुल्लाह के हथियारों को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता, इजराइल अपनी सीमा के पास लेबनान के अंदर 10 किलोमीटर तक एक सुरक्षा क्षेत्र (Security Zone) बनाए रखेगा।
  • अमेरिका इस पूरे काम की निगरानी के लिए एक मिलिट्री कोऑर्डिनेशन ग्रुप (MCG4L) बनाने में मदद करेगा।

अमेरिका की आर्थिक मदद

अमेरिका ने इस शांति प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए पैसों की मदद का वादा किया है। संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर लेबनान को 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा लेबनानी सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए 30 मिलियन डॉलर अलग से दिए जाएंगे।

बड़े नेताओं ने क्या कहा

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे शांति की दिशा में पहला और सबसे कठिन कदम बताया है। इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे एक बड़ी उपलब्धि और ईरान के लिए बड़ा झटका कहा है। उन्होंने साफ किया कि ईरान और हिजबुल्लाह का लेबनान में कोई रोल नहीं होना चाहिए। वहीं लेबनानी राजदूत Nada Hamadeh Moawad ने इसे लेबनान की अखंडता वापस पाने का पहला कदम बताया।

हिजबुल्लाह ने किया विरोध

इस समझौते को हिजबुल्लाह ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। हिजबुल्लाह नेता Naim Qassem ने इसे एक ढोंग बताया है। उन्होंने मांग की है कि इजराइल को पूरी तरह वापस जाना होगा, तभी वह किसी भी युद्धविराम को स्वीकार करेंगे। हिजबुल्लाह ने इस समझौते को रोकने की चेतावनी देते हुए गृहयुद्ध का संकेत भी दिया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.