लेबनान और इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। 2 मार्च 2026 को शुरू हुई इस लड़ाई में दोनों तरफ से भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। हालिया जानकारी के मुताबिक, पिछले 24 दिनों में हिजबुल्लाह ने इजरायल के कई सैन्य ठिकानों और टैंकों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस संघर्ष की वजह से लेबनान में बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है और 12 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

युद्ध की अब तक की बड़ी बातें और नुकसान का आंकड़ा

मार्च की शुरुआत से चल रहे इस युद्ध में इजरायल और लेबनान दोनों ने एक-दूसरे पर हजारों रॉकेट और मिसाइलें दागी हैं। इजरायली सेना ने लेबनान के अंदर जमीनी हमला भी शुरू कर दिया है। यहां कुछ मुख्य आंकड़े दिए गए हैं जो युद्ध की स्थिति को बताते हैं:

विवरण संख्या और जानकारी
युद्ध की शुरुआत 2 मार्च 2026
लेबनान में कुल मौतें लगभग 1,189
विस्थापित लोग 12 लाख से अधिक
इजरायल पर दागे गए रॉकेट 3500 से ज्यादा
इजरायल के जवाबी हमले 1200 से ज्यादा

हिजबुल्लाह का दावा है कि उन्होंने इजरायल के करीब 93 टैंकों को निशाना बनाया है जिससे इजरायल के बख्तरबंद दस्ते को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि इजरायल ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के कई सीनियर कमांडरों और हथियारों के ठिकानों को खत्म करने की बात कही है।

इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच ताजा हालात क्या हैं?

इजरायल ने दक्षिण लेबनान में एक बफर जोन बनाने के लिए और अधिक सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया है। दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह ने साफ कर दिया है कि वह एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार है और उसके पास नए तरीके के ड्रोन हमले करने की क्षमता है। संयुक्त राष्ट्र ने इस बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है।

  • इजरायली वायु सेना ने ‘Operation Roaring Lion’ के तहत ईरान और लेबनान में 250 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है।
  • लेबनान सरकार ने अपनी सीमाओं से हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की है।
  • ईरान ने इस युद्ध को खत्म करने के लिए हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले बंद करने की शर्त रखी है।
  • हाल ही के हमलों में इजरायली सैनिकों के साथ-साथ आम नागरिकों और पत्रकारों की भी जान गई है।

इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हिजबुल्लाह को फिर से हथियार जुटाने का मौका नहीं देगा। वहीं लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में हमलों की तीव्रता बढ़ी है जिससे मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।