इज़रायली सेना (IDF) ने लेबनान के पश्चिमी बेक्का क्षेत्र के छह गांवों के निवासियों को संभावित सैन्य कार्रवाई से पहले इलाका खाली करने की सख्त चेतावनी दी है। आईडीएफ के अरबी भाषा के प्रवक्ता कर्नल अविचाय अदराई ने सोमवार, 30 मार्च 2026 को यह आदेश जारी किया। सेना का कहना है कि इन क्षेत्रों में हिजबुल्लाह की गतिविधियों के कारण सैन्य अभियान चलाना ज़रूरी हो गया है। अब तक की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस युद्ध के चलते 12 लाख से ज़्यादा लेबनानी नागरिक विस्थापन का शिकार हो चुके हैं और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

किन गांवों को खाली करने का मिला है निर्देश?

इज़रायली सेना ने पश्चिमी बेक्का क्षेत्र के जिन गांवों के लिए खाली करने का फरमान जारी किया है, उनके नाम नीचे दिए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए तुरंत इन इलाकों को छोड़कर बेक्का घाटी में क़ाराउन शहर के उत्तर की ओर चले जाएं।

  • कालाया (Kalaya)
  • ज़लाया (Zalaya)
  • लाबाया (Labaya)
  • यहमार (Yahmar)
  • सहमार (Sahmar)
  • दलफ़ेह (Dalfeh)

सेना ने स्पष्ट किया है कि उसका इरादा नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन हिजबुल्लाह की मौजूदगी के कारण इन क्षेत्रों में सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आदेशों से विस्थापन की समस्या और गंभीर हो सकती है, क्योंकि अधिकांश शेल्टर पहले से ही भरे हुए हैं।

इज़रायल की सैन्य रणनीति और वर्तमान स्थिति

इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज ने इस कार्रवाई के पीछे की रणनीति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि सेना लिटानी नदी तक दक्षिणी लेबनान को नियंत्रित करना चाहती है ताकि एक सुरक्षा घेरा यानी बफर जोन बनाया जा सके। सेना का लक्ष्य उन ठिकानों को खत्म करना है जहां से इज़रायल पर हमले की योजना बनाई जाती है।

प्रमुख अपडेट विवरण
विस्थापित लोग 10 लाख से अधिक (मार्च 2026 तक)
ताज़ा घटना दक्षिणी लेबनान में दो UNIFIL शांति सैनिकों की मौत
सैन्य लक्ष्य दक्षिणी लेबनान को लिटानी नदी तक नियंत्रित करना
अगला कदम हिजबुल्लाह के गढ़ों पर हवाई और ज़मीनी कार्रवाई

लेबनान सरकार ने इन चेतावनियों और सैन्य कार्रवाइयों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि रोज़ाना हज़ारों बच्चे और परिवार बेघर हो रहे हैं, जिनके पास बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।