इजराइल और लेबनान के बीच चल रहा नाजुक युद्धविराम एक बार फिर खतरे में पड़ गया है। इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने लेबनान में Hezbollah के ठिकानों पर जोरदार हमले करने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई के बाद दक्षिण लेबनान में कई लोगों की जान गई है और इलाके में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
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इजराइल ने लेबनान पर हमले क्यों किए और अब तक क्या नुकसान हुआ है?
इजराइल का दावा है कि Hezbollah ने युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए उसने रॉकेट लॉन्च साइट्स और लड़ाकों को निशाना बनाया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार 25 अप्रैल को दक्षिण लेबनान में हुए हमलों में छह लोगों की मौत हो गई। इनमें से चार लोग योहमोर अल-शकीफ में हुए हमलों में मारे गए।
लेबनान में हालात काफी खराब हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2 मार्च से अब तक 2,496 लोग मारे गए हैं और 7,725 घायल हुए हैं। इस युद्ध की वजह से करीब 1.2 मिलियन लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का क्या कहना है?
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल ने समूह के लगभग 90% मिसाइल और रॉकेट भंडारों को तबाह कर दिया है। उन्होंने साफ किया कि जब तक उत्तरी इजराइल के नागरिकों को पूरी सुरक्षा नहीं मिल जाती, यह अभियान जारी रहेगा।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 24 अप्रैल को युद्धविराम को तीन हफ्ते के लिए आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका हिजबुल्लाह से बचाव में लेबनान की मदद करेगा और आने वाले हफ्तों में वह नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun से मुलाकात करेंगे।
हिजबुल्लाह की जवाबी कार्रवाई और लेबनान सरकार का रुख क्या है?
हिजबुल्लाह ने इजरायली हमलों का जवाब देते हुए दक्षिण लेबनान में इजरायली सेना के एक वाहन को निशाना बनाया। समूह का कहना है कि यह युद्धविराम उनके सहयोगी ईरान के भारी दबाव में संभव हुआ था। उन्होंने मांग की है कि इजरायली सेना पूरी तरह पीछे हट जाए।
लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने कहा कि उनकी सरकार जल्द ही बेरूत और पूरे गवर्नररेट पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में हथियारों का इस्तेमाल केवल सरकारी बलों तक ही सीमित रहेगा।