लेबनान में इसराइल के हमले एक बार फिर तेज हो गए हैं. हैरानी की बात यह है कि यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच शांति हो. आम लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है क्योंकि उन्हें अब बस इस खूनी जंग का अंत चाहिए. इन हमलों में कई मासूम लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
अमेरिका की कोशिश और ऐतिहासिक बातचीत का क्या हुआ?
14 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन डी.सी. में अमेरिका ने एक बहुत बड़ी मीटिंग कराई थी. इसमें अमेरिका, इसराइल और लेबनान के बड़े अधिकारी शामिल हुए थे. साल 1993 के बाद यह पहली बार था जब ये दोनों देश आमने-सामने बैठे थे. दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई थी, लेकिन अगली ही रात फिर से बमबारी शुरू हो गई, जिससे शांति की उम्मीदें कम हो गई हैं.
अब तक कितना नुकसान हुआ और क्या है जमीनी हाल?
लेबनान में हालात बहुत ज्यादा खराब हैं. 2 मार्च 2026 से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 2,000 से ज्यादा लेबनानी लोग मारे जा चुके हैं. लगभग 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं. 15 अप्रैल को टायर शहर के पास एक ड्रोन हमले में 19 साल की गदिर बालबकी की मौत हो गई, जिसने पूरे इलाके में तनाव बढ़ा दिया है.
अलग-अलग देशों और संगठनों का इस पर क्या कहना है?
| संस्था या देश | मुख्य मांग और बयान |
|---|---|
| संयुक्त राष्ट्र (UN) | कानून का पालन करें और तुरंत युद्ध रोककर डिप्लोमेसी अपनाएं. |
| अमेरिका | इज़राइल और लेबनान खुद आपस में समझौता करें, अमेरिका बीच में मदद करेगा. |
| इज़राइल | लेबनान में आतंकी समूहों के हथियार खत्म होने चाहिए तभी सुरक्षा मिलेगी. |
| लेबनान | देश की आजादी बनी रहे और मानवीय संकट को दूर करने के लिए ceasefire हो. |
| हिजबुल्लाह | सीधी बातचीत को बेकार बताया और इसराइली सेना पर हमले जारी रखे. |
