वाशिंगटन में करीब 33 साल बाद इसराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों की एक बड़ी बैठक हुई है। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio की मध्यस्थता में हुई इस मुलाकात को शांति की ओर एक बड़ा कदम बताया गया है। हालांकि, इस बैठक के बाद हिजबुल्लाह ने इसे शर्मनाक बताते हुए कड़ा विरोध जताया है और तनाव और बढ़ गया है।

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इस ऐतिहासिक बैठक में क्या हुआ?

यह मुलाकात 14 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी विदेश विभाग में हुई। 1993 के बाद यह पहली बार था जब दोनों देशों के उच्च स्तरीय अधिकारियों ने आमने-सामने बात की। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया और कहा कि इसका मकसद एक स्थायी शांति ढांचा तैयार करना है। इस बैठक में लेबनान की राजदूत Nada Hamadeh Moawad और इसराइल के राजदूत Yechiel Leiter शामिल हुए।

दोनों देशों का अपना-अपना क्या पक्ष है?

लेबनान की राजदूत Nada Hamadeh Moawad ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया और युद्धविराम की मांग दोहराई। उन्होंने देश की संप्रभुता और विस्थापित लोगों की वापसी पर जोर दिया। दूसरी तरफ, इसराइल के राजदूत Yechiel Leiter ने कहा कि लेबनान को हिजबुल्लाह से मुक्त करना जरूरी है। इसराइल ने साफ कर दिया कि वह हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम पर बात नहीं करेगा बल्कि उनका निशस्त्रीकरण ही मुख्य मुद्दा होगा।

हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया और मौजूदा हालात क्या हैं?

हिजबुल्लाह के वरिष्ठ नेता Mohammad Raad ने इस बैठक को शर्मनाक बताया और कहा कि इससे लेबनान की संप्रभुता को नुकसान पहुंचता है। बैठक शुरू होते ही हिजबुल्लाह ने उत्तरी इसराइल के शहरों पर रॉकेट हमले शुरू कर दिए। इस पूरे विवाद और संघर्ष के आंकड़ों को नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:

विवरण जानकारी
लेबनान में मौतें 2,000 से ज्यादा लोग
इसराइल में मौतें 12 सैनिक और 2 नागरिक
अगली बैठक कुछ हफ्तों बाद वाशिंगटन में संभावित

लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने आंतरिक तनाव और हिजबुल्लाह समर्थकों के विरोध के कारण अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी है। वहीं, लेबनान की नई सरकार ने गैर-राज्य अभिनेताओं के हथियारों को खत्म करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन इसराइल को अभी भी इस बात पर संदेह है।