लेबनान के दक्षिण में स्थित शहर याहमोर अल-शाकिफ में इसराइल ने फिर से हमले किए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इन दो हमलों में कम से कम चार लोगों की जान चली गई है। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम की अवधि को आगे बढ़ाया गया था।
लेबनान में हमलों का असर और हताहतों की संख्या क्या है?
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 25 अप्रैल 2026 को हुए हमलों में चार लोग मारे गए। इससे पहले 22 अप्रैल को भी इसी इलाके में हमले हुए थे जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी और दो घायल हुए थे। अगर पूरे घटनाक्रम की बात करें तो 2 मार्च 2026 से अब तक इसराइल के हमलों में लेबनान के 2,491 लोग मारे गए हैं और 7,719 लोग घायल हुए हैं।
सीज़फायर और संयुक्त राष्ट्र (UN) का इस पर क्या कहना है?
अमेरिका की मदद से इसराइल और लेबनान के बीच तीन हफ्ते के लिए अस्थायी युद्धविराम (ceasefire) बढ़ाया गया था। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस फैसले का स्वागत किया था, लेकिन हालिया हमलों को इस समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है। UN ने इस मामले में कुछ मुख्य बातें कही हैं:
- इसराइल को ब्लू लाइन के उत्तर से पूरी तरह पीछे हटने और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा गया है।
- हिज़बुल्लाह जैसे गैर-सरकारी संगठनों को लेबनान सरकार के फैसलों को मानने और हथियारों पर सरकार का नियंत्रण मजबूत करने की सलाह दी गई है।
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइल के हमलों में रिहायशी इमारतों और नागरिकों को निशाना बनाया गया है। वहीं हिज़बुल्लाह ने भी इसराइल के रिहायशी इलाकों में बिना गाइड वाले रॉकेट दागे हैं।
हिज़बुल्लाह ने इसराइल की कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी?
हिज़बुल्लाह के सांसद अली फय्याद ने युद्धविराम के विस्तार को बेकार बताया है। उनका कहना है कि जब तक इसराइल हत्याएं, गोलाबारी और लेबनान के सीमावर्ती गांवों को तबाह करना बंद नहीं करता, तब तक इस समझौते का कोई मतलब नहीं है। फय्याद ने यह भी साफ किया कि युद्धविराम की शर्तें सिर्फ लेबनान पर लागू होती हैं, इसराइल पर नहीं, इसलिए हिज़बुल्लाह जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार रखता है।