इसराइल और लेबनान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. इसराइली सेना ने दावा किया है कि उन्होंने दक्षिण लेबनान में अपनी बनाई ‘येलो लाइन’ पार करने वाले हिज़्बुल्लाह के सदस्यों को मार गिराया है. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच अमेरिका की मदद से युद्धविराम लागू था.

क्या है यह ‘येलो लाइन’ और इसराइल ने इसे क्यों बनाया?

इसराइल ने दक्षिण लेबनान में अपनी सुरक्षा के लिए एक सैन्य सीमा बनाई है, जिसे ‘येलो लाइन’ कहा जा रहा है. यह कोई अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर नहीं है, बल्कि इसराइल द्वारा बनाया गया एक बफर जोन है. इसराइल का कहना है कि वह यहाँ हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को खत्म कर रहा है ताकि अपने उत्तरी इलाकों की रक्षा कर सके. लेबनान और हिज़्बुल्लाह इस कदम को एकतरफा फैसला और हमलावर बता रहे हैं.

युद्धविराम के बीच रॉकेट हमले और तबाही का क्या हाल है?

17 अप्रैल 2026 को शुरू हुए युद्धविराम के बावजूद दोनों तरफ से हमले जारी रहे. हिज़्बुल्लाह ने 21 अप्रैल को उत्तरी इसराइल के Kfar Giladi इलाके में रॉकेट और ड्रोन दागे. जवाब में इसराइल ने लेबनान के बेका क्षेत्र में हमला किया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो घायल हुए. लेबनान की सरकारी एजेंसी NNA ने बताया कि इसराइली सेना दक्षिण लेबनान में कई जगहों पर घरों और बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रही है.

नेताओं ने क्या कहा और अब आगे क्या होगा?

इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा है कि अगर खतरा बढ़ा तो सेना पूरी ताकत का इस्तेमाल करेगी. दूसरी तरफ, लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि उनकी सरकार किसी के दबाव में नहीं आएगी. इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए 24 अप्रैल 2026 को अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल और लेबनान के बीच राजदूत स्तर की दूसरी दौर की बातचीत होनी है.

Sushma Kumari

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