इजरायली मीडिया ने माना ईरान की मिसाइलों का लोहा, कतर और जॉर्डन में तबाह हुए अमेरिका के रडार सिस्टम
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने अब एक नया रूप ले लिया है। इजरायली मीडिया ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने सटीक निशाना लगाकर अमेरिकी एयर डिफेंस रडार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। ‘द यरूशलेम पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान का यह हमला इस इलाके के अन्य देशों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। ईरान की तरफ से ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ चलाया जा रहा है और 9 मार्च 2026 तक मिसाइल हमलों की 30वीं लहर देखी गई। यह सब ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई के कार्यभार संभालने के तुरंत बाद हुआ।
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किन देशों में रडार हुए तबाह और कौन सी मिसाइलें हुईं इस्तेमाल?
ईरान ने अपने हमलों में हाइपरसोनिक और आधुनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है जिससे बचने का समय नहीं मिल पा रहा है। इस हमले का असर खाड़ी देशों में लगे डिफेंस सिस्टम पर भी पड़ा है।
- जॉर्डन: मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर लगा अमेरिका का थाड (THAAD) सिस्टम का AN/TPY-2 रडार पूरी तरह तबाह हो गया।
- कतर: लंबी दूरी तक निगरानी करने वाला AN/FPS-132 रडार नष्ट हो गया।
- अन्य देश: यूएई, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में भी रडार और डिफेंस से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
- मिसाइलें: ईरान ने मुख्य रूप से घाद्र, इमाद, फतह (हाइपरसोनिक) और खैबर शेकन मिसाइलों से हमला किया।
आम लोगों और खाड़ी देशों पर इसका क्या असर है?
युद्ध के कारण आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर खतरे के कारण कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों के लिए भी यह एक चिंता का विषय है क्योंकि बहरीन के सित्रा इलाके में एक ड्रोन हमले में 32 लोग घायल हो गए। इसके अलावा शुरुआत में ड्रोन हमलों के कारण 6 अमेरिकी सैनिकों की भी जान गई। ईरान की सेना का कहना है कि रडार तबाह होने के कारण अब इजरायल में मिसाइल गिरने के बाद सायरन बज रहे हैं।
अमेरिका और विशेषज्ञों का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर अमेरिकी सेना (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने माना कि रडार को नुकसान पहुंचना एक गंभीर बात है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि जवाबी कार्रवाई के कारण ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता 90 प्रतिशत तक कम कर दी गई है। इजरायल की सेना (IDF) भी ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार एक जगह फिक्स रहने वाले रडार सिस्टम आधुनिक मिसाइलों का आसान शिकार बन जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार रूस की सैटेलाइट मदद से ईरान ने अपने निशानों की सटीकता को काफी बढ़ा लिया है।





