इसराइल ने साफ़ कर दिया है कि वह हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकेगा. भले ही लेबनान के साथ सीज़फायर का एक ढांचा तैयार हुआ है, लेकिन डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Sharren Haskel ने बुधवार को कहा कि हिज़्बुल्लाह से खतरा अभी टला नहीं है. उनका मानना है कि जब तक हिज़्बुल्लाह के हथियार जमा नहीं हो जाते, तब तक लेबनान में स्थायी शांति आना नामुमकिन है.

डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर ने यह भी कहा कि लेबनान से ईरानी प्रभाव को खत्म करना बहुत जरूरी है ताकि पूरे इलाके में सुरक्षा बनी रहे. उन्होंने साफ़ किया कि सीज़फायर फ्रेमवर्क सहयोग के लिए है, लेकिन अगर हिज़्बुल्लाह इसराइल की जमीन पर हमला करता है, तो इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई जारी रखेगा.

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का बयान

इससे पहले 30 जून 2026 को प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी इसी बात पर जोर दिया था. उन्होंने कहा कि दक्षिण लेबनान के सुरक्षा ज़ोन में इसराइल की सेना तब तक तैनात रहेगी, जब तक हिज़्बुल्लाह पूरी तरह से खतरा नहीं बन जाता. नेतन्याहू ने दावा किया कि हिज़्बुल्लाह के पास मौजूद रॉकेट और मिसाइलों का भंडार अब काफी कम हो चुका है.

क्या है शांति समझौता और हिज़्बुल्लाह का रुख

इस पूरे मामले की जानकारी इस प्रकार है:

  • अमेरिकी कोशिश: 26 जून 2026 को अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसराइल और लेबनान के बीच एक समझौते की घोषणा की थी. इसमें इसराइल की वापसी को हिज़्बुल्लाह के निशस्त्रीकरण से जोड़ा गया था.
  • हिज़्बुल्लाह की ना: 27 जून 2026 को हिज़्बुल्लाह लीडर Naim Kassem ने इस समझौते को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि जब तक इसराइल लेबनान से पूरी तरह बाहर नहीं निकलता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी.
  • पुरानी रंजिश: दोनों पक्षों के बीच यह युद्ध अक्टूबर 2023 से चल रहा है. नवंबर 2024 में एक 60 दिन का समझौता हुआ था, लेकिन समय-समय पर दोनों तरफ से नियमों के उल्लंघन की खबरें आती रहीं.

फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और इसराइल अपनी सेना को लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में बनाए रखने पर अड़ा हुआ है.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.