इसराइल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान की तरफ से वहां के आम नागरिकों के फोन पर डराने वाले मैसेज भेजे गए हैं। इसराइल के नेशनल साइबर निदेशालय ने कहा है कि इन मैसेज का मकसद लोगों के बीच डर पैदा करना और उनकी सुरक्षा की भावना को कमजोर करना है।
ईरान के इन मैसेज में क्या है और इसका मकसद क्या है?
12 मई 2026 को नेशनल साइबर निदेशालय ने पुष्टि की कि नागरिकों के फोन पर डराने वाले मैसेज भेजे गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह सब लोगों में घबराहट फैलाने के लिए किया गया है। इससे पहले जनवरी 2026 में भी हजारों इसराइलियों को उनके निजी विवरणों के साथ धमकी भरे मैसेज मिले थे। सरकार ने इसे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक कोशिश बताया था।
साइबर हमलों का बढ़ता सिलसिला और सरकार की सलाह
साइबर निदेशालय के अनुसार, ईरान से जुड़े ‘Handala’ जैसे हैकर ग्रुप लगातार हमले कर रहे हैं। अप्रैल 2026 में भी व्हाट्सएप के जरिए धमकी भरे मैसेज भेजे गए थे। मार्च 2026 में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका और इसराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की तरफ से जवाबी साइबर हमले बढ़ सकते हैं। सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक करें, उन्हें स्पैम के रूप में रिपोर्ट करें और 119 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।
साइबर युद्ध की चेतावनी और सुरक्षा उपाय
दिसंबर 2025 में नेशनल साइबर निदेशालय के महानिदेशक Yossi Karadi ने एक बड़े ‘साइबर युद्ध’ की चेतावनी दी थी। उन्होंने बताया था कि ईरान नागरिकों को निशाना बनाने के लिए ‘Operation Rising Lion’ जैसे अभियानों का इस्तेमाल कर रहा है जिसमें 1,200 से ज्यादा कैंपेन चलाए गए। इन हमलों को रोकने के लिए Meta कंपनी भी इसराइल की सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इसराइल के लोगों को किस तरह के मैसेज मिल रहे हैं?
लोगों को डराने वाले और धमकी भरे मैसेज मिल रहे हैं जिनमें कभी-कभी उनकी निजी जानकारी भी होती है। इसका मुख्य मकसद लोगों के मन में डर पैदा करना और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है।
इन मैसेज से बचने के लिए सरकार ने क्या सलाह दी है?
सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक करें और इसकी जानकारी 119 हेल्पलाइन नंबर पर दें।
