इजरायल की संसद Knesset ने एक बहुत ही विवादित कानून पास किया है, जिसके तहत फलस्तीनियों को मौत की सजा दी जा सकेगी। यह कानून मुख्य रूप से वेस्ट बैंक में रहने वाले उन फलस्तीनियों के लिए है जिन्हें किसी हमले या घटना का दोषी माना जाएगा। इस फैसले के बाद पूरी दुनिया में इजरायल की आलोचना शुरू हो गई है। मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इसे भेदभावपूर्ण बताया है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। यह नया नियम अगले 30 दिनों के भीतर प्रभावी हो जाएगा।

👉: Lebanon Israel War: लेबनान में इजरायली हवाई हमला, गर्भवती महिला समेत 8 की मौत, UN शांति रक्षकों की भी गई जान

इस नए कानून के मुख्य प्रावधान क्या हैं?

इस कानून के आने के बाद इजरायल की सैन्य अदालतों को बड़ी ताकत मिल गई है। अब मिलिट्री कोर्ट के न्यायाधीश केवल साधारण बहुमत से ही फलस्तीनियों को फांसी की सजा सुना सकेंगे। पहले इसके लिए सभी जजों का एकमत होना जरूरी होता था। सजा सुनाए जाने के बाद 90 दिनों के भीतर फांसी देना अनिवार्य होगा। हालांकि, देश के प्रधानमंत्री इस सजा को 180 दिनों तक टालने की सिफारिश कर सकते हैं। यह कानून विशेष रूप से वेस्ट बैंक के लोगों पर लागू होगा और इजरायली नागरिकों को इससे बाहर रखा गया है।

दुनिया भर की संस्थाओं ने कानून पर क्या कहा?

इस कानून के पास होते ही कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने अपनी चिंता जाहिर की है और इसे भेदभावपूर्ण करार दिया है। विरोध करने वाली मुख्य संस्थाएं और उनके तर्क नीचे दिए गए हैं:

  • United Nations: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा है।
  • European Union: यूरोपीय संघ ने कहा है कि मौत की सजा जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
  • Human Rights Watch: संस्था ने इसे भेदभाव बढ़ाने वाला और दोहरी न्याय व्यवस्था वाला कानून बताया है।
  • Adalah: इस संगठन ने इजरायल के सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने के लिए याचिका दायर की है।
  • Britain & France: इन देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इस कानून के भेदभावपूर्ण चरित्र पर दुख जताया है।

कानून से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी

विषय विवरण
सजा का माध्यम फांसी द्वारा मृत्यु (Death by Hanging)
लक्ष्य वेस्ट बैंक के फलस्तीनी नागरिक
वोटिंग परिणाम 62 पक्ष में और 48 विरोध में वोट पड़े
न्यायिक अधिकार सैन्य अदालतों को साधारण बहुमत का अधिकार
कानूनी पाबंदी वकील और परिवार से मिलने की सुविधाओं पर रोक

इस कानून को इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर Itamar Ben Gvir की पार्टी ने पेश किया था। कानून पास होने के दौरान मंत्री को सदन में फांसी के फंदे जैसा पिन लगाए हुए देखा गया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कानून एक ही तरह के अपराध के लिए अलग-अलग जातियों के लिए अलग-अलग सजा तय करता है, जो कि न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। फलस्तीनी अथॉरिटी ने भी इसे एक युद्ध अपराध बताया है और वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com