इसराइल में एक नया कानूनी ढांचा लाया गया है जिससे दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों में खलबली मच गई है। इस प्रस्तावित कानून के तहत खास अदालतों को यह अधिकार मिलेगा कि वे टॉर्चर यानी प्रताड़ना के जरिए हासिल किए गए सबूतों को स्वीकार कर सकें। साथ ही, इन अदालतों की कार्यवाही को सार्वजनिक रूप से ब्रॉडकास्ट भी किया जाएगा।

इसराइल के नए कानून में क्या प्रावधान हैं?

यह नया बिल इसराइली संसद यानी Knesset में अंतिम रीडिंग के लिए पहुंचा है। इस कानून की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • खास सैन्य अदालतें: यह कानून उन Palestinians के लिए होगा जिन पर 7 अक्टूबर के हमलों में शामिल होने का आरोप है।
  • सबूतों के नियम: इन अदालतों को सबूतों, कानूनी प्रक्रियाओं और हिरासत के सामान्य नियमों को बदलने का अधिकार होगा।
  • मौत की सजा: जजों के पास मौत की सजा सुनाने का पूरा अधिकार होगा।
  • ब्रॉडकास्टिंग: सुनवाई की शुरुआत, फैसले और सजा जैसे अहम पलों को एक खास वेबसाइट पर लाइव दिखाया जाएगा।
  • भेदभाव: यह कानून सिर्फ सैन्य अदालतों में बंद Palestinians पर लागू होगा, जबकि इसराइल के नागरिकों को इससे बाहर रखा गया है।

मानवाधिकार संगठनों ने क्यों जताया विरोध?

इस कानून को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जाहिर की है। Adalah की वकील Muna Haddad ने इस बिल का औपचारिक विरोध किया और कहा कि यह जानबूझकर कानूनी सुरक्षा को कम करने की कोशिश है ताकि बड़ी संख्या में लोगों को सजा दिलाई जा सके।

UN की स्पेशल रैपोर्टर Alice Jill Edwards ने चेतावनी दी कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि प्रताड़ना के जरिए लिए गए बयानों से गलत सजा होने का खतरा बढ़ जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिस्टम की सैन्य अदालतों में सजा की दर लगभग 96% है, जो निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठाती है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इसराइल का नया कानूनी ढांचा किन लोगों पर लागू होगा?

यह कानून केवल उन Palestinians पर लागू होगा जो सैन्य अदालतों के दायरे में आते हैं और जिन पर 7 अक्टूबर के हमलों का आरोप है। इसमें इसराइल के नागरिकों को शामिल नहीं किया गया है।

इस कानून का विरोध करने वाले विशेषज्ञों का क्या कहना है?

UN विशेषज्ञों और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि टॉर्चर से मिले सबूतों को मानना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इससे गलत सजा मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com