इसराइल ने अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। अब वह अपनी सरहदों पर ईरान के समर्थन वाले आतंकी संगठनों को फिर से ताकतवर नहीं होने देगा। पूर्व प्रवक्ता Eylon Levy ने साफ़ किया है कि 7 अक्टूबर के हमलों के बाद अब इसराइल की रणनीति पूरी तरह बदल चुकी है और वह किसी भी हाल में प्रॉक्सी आर्मी को अपने घरों के करीब पनपने नहीं देगा।
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बदली हुई सुरक्षा रणनीति
इसराइल की नई सुरक्षा नीति का मुख्य मकसद यह है कि दुश्मन अपनी ताकत को फिर से न बढ़ा सके। पहले इसराइल का ध्यान चेतावनी देने और बचाव करने पर था, लेकिन अब “दुश्मन की ताकत को बढ़ने से रोकना” उसकी रणनीति का सबसे जरूरी हिस्सा बन गया है। इसका मतलब है कि अब गाज़ा, सीरिया और लेबनान के साथ लगने वाली सीमाओं की स्थिति बदल जाएगी।
रक्षा मंत्री Israel Katz और प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने तय किया है कि लेबनान, सीरिया और गाज़ा के सुरक्षा ज़ोन में इसराइल की सेना अनिश्चितकाल तक तैनात रहेगी। इन सुरक्षा ज़ोन का इस्तेमाल इसराइल की बस्तियों को बचाने के लिए किया जाएगा। रक्षा मंत्री के अनुसार, इन इलाकों से स्थानीय निवासियों को हटाया जाएगा और आतंकी ठिकानों समेत सभी घरों को नष्ट कर दिया जाएगा जिन्हें आतंकी चौकियों के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
अमेरिका और ईरान के साथ संबंध
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 15 जून 2026 को राष्ट्रपति Donald Trump से बातचीत की। उन्होंने साफ़ कर दिया कि इसराइल लेबनान से अपनी सेना वापस नहीं लेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई शांति समझौता होता है, तो इसराइल उसकी लेबनान से जुड़ी शर्तों को मानने के लिए मजबूर नहीं है।
पूर्व प्रवक्ता Eylon Levy ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इसराइल के बीच तालमेल कम होता है, तो इससे ईरान के शासन को और ज्यादा ताकत मिलेगी। उन्होंने राजनयिक कोशिशों पर भी संदेह जताया और कहा कि केवल बातचीत से ईरान के प्रभाव को नहीं रोका जा सकता।
ताजा हालात
हाल ही में 14 जून 2026 को Hezbollah ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए इसराइल की सेना पर रॉकेट और एंटी-टैंक मिसाइलें दागी थीं, जिसके बाद इसराइल की वायुसेना ने जवाबी हमले किए। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते की खबरें भी आ रही हैं, लेकिन इसराइल ने अपनी सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया हुआ है।