इसराइल में एक विवादित बिल लाया गया है जिससे पुराने शांति समझौते यानी ओस्लो समझौते (Oslo Accords) को खत्म किया जा सकता है. इस बिल का मुख्य मकसद फिलिस्तीन को एक अलग देश बनने से रोकना है. इस प्रस्ताव पर रविवार, 12 मई 2026 को एक मंत्री समिति विचार करेगी.

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यह बिल किसने पेश किया और इसके पीछे क्या कारण है?

यह बिल नेस्सेट की डिप्टी स्पीकर Limor Son Har-Melech ने पेश किया है, जो Otzma Yehudit पार्टी से हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उनका मकसद फिलिस्तीन देश के गठन को रोकना है. उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि एरिया A और B में बस्तियों को बढ़ावा दिया जाए और ओस्लो समझौते को रद्द किया जाए. उनके मुताबिक यह कदम हालात को ठीक करने के लिए जरूरी है.

ओस्लो समझौता क्या है और इसे हटाने की मांग क्यों हो रही है?

ओस्लो समझौता 13 सितंबर 1993 को इसराइल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के बीच हुआ था. इसे अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की देखरेख में साइन किया गया था. इसी समझौते के बाद फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) बनी थी, जो वेस्ट बैंक के एरिया A और B का प्रशासन संभालती है. लेकिन लिमर सोन हर-मेलेक का कहना है कि इस समझौते से शांति नहीं मिली बल्कि आतंकवाद बढ़ा, इसलिए अब इसे खत्म करना national correction यानी राष्ट्रीय सुधार है.

क्या पहले भी ऐसे प्रयास हुए हैं?

  • फरवरी 2026 में फाइनेंस मिनिस्टर Bezalel Smotrich ने इस समझौते को खत्म करने और PA को हटाने की बात कही थी.
  • मार्च 2025 में मंत्री Itamar Ben-Gvir ने भी ओस्लो समझौते और अन्य प्रोटोकॉल को रद्द करने के लिए बिल पेश किया था.
  • सितंबर 2025 में MK Tzvi Succot ने एक बिल पेश किया था जिससे सरकार को समझौतों को रद्द करने का अधिकार मिले.

Frequently Asked Questions (FAQs)

इस बिल की समीक्षा कब होगी?

इस बिल की समीक्षा 12 मई 2026 को इसराइल की एक मंत्री समिति द्वारा की जाएगी, जो तय करेगी कि सरकार इस बिल का समर्थन करेगी या नहीं।

ओस्लो समझौता क्या है?

यह 1993 में इसराइल और PLO के बीच हुआ एक समझौता था, जिसका मकसद शांति स्थापित करना और फिलिस्तीनी अथॉरिटी का गठन करना था।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.