इज़राइल की जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की हालत को लेकर एक बार फिर दुनिया भर में हंगामा मच गया है. 17 अप्रैल को ‘फिलिस्तीनी कैदी दिवस’ के मौके पर कई बड़ी संस्थाओं ने जेलों के अंदर हो रहे भयानक जुल्मों का खुलासा किया है. संयुक्त राष्ट्र (UN) और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वहां कैदियों को बुरी तरह टॉर्चर किया जा रहा है और उनके साथ यौन हिंसा हो रही है.

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जेलों के अंदर क्या हो रहा है और कौन से आरोप लगे हैं?

UN की स्पेशल रैपोर्टर Francesca Albanese ने बताया कि फिलिस्तीनियों को टॉर्चर करना अब इज़राइल की सरकारी नीति बन गया है. उनकी रिपोर्ट में यौन हिंसा, बलात्कार, भूखा रखने और अमानवीय व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. Euro-Med Human Rights Monitor ने इसे ‘दीवारों के पीछे नरसंहार’ कहा है. वहीं B’Tselem जैसे संगठनों ने इन जेलों को टॉर्चर कैंप बताया है जहां कैदियों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

कैदियों की संख्या और नए कानूनों का क्या असर है?

ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इज़राइली जेलों में बंद फिलिस्तीनी और अरब राजनीतिक कैदियों की संख्या 9,600 के पार पहुंच गई है. अक्टूबर 2023 के बाद से इसमें 83% की बढ़ोतरी हुई है. मार्च 2026 में इज़राइली संसद ने ‘कैदियों को फांसी देने का कानून’ पास किया, जिसे नस्लवादी और भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है. कई कैदियों को बिना किसी ट्रायल या आरोप के प्रशासनिक हिरासत में रखा गया है और उन्हें इलाज जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं.

विवरण जानकारी
कुल फिलिस्तीनी कैदी 9,600 से ज़्यादा
महिला कैदी 86
बच्चे 350
प्रशासनिक हिरासत (बिना ट्रायल) 3,532
नया विवादित कानून Law for Executing Prisoners (मार्च 2026)
मुख्य आरोप टॉर्चर, यौन हिंसा और मेडिकल लापरवाही
Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com